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सूरजगढ़ पुल का टोल नाका बना अवैध वसूली का गढ़,आचार संहिता में कैसे बदल गया ठेकेदार.?साय सरकार की छबि धूमिल करने की हो सकती है मंशा.?

रायगढ़। जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी तो भाजपा ने जमकर घोटालों को लेकर हाहाकार मचाया कोयला घोटाला,चावल घोटाला, शराब घोटाला जैसे कई मुद्दों को लेकर सदन से सडक़ की लड़ाई लड़ा था और चुनावी मैदान में तो भ्रष्टचार और घोटाला जैसे कई मुद्दों को लेकर लगातार जनता के बीच बाते रखी और कई तरह की नारा स्लोगन से कांग्रेस पर निशाना साधा करते थे, जिनमे प्रमुख थे आग लगी है आग भाग भूपेश भाग,बहुत हुआ भ्रष्टचार अबकी बार भाजपा सरकार जैसे कई नारो सहित पूर्व प्रदेश सरकार के खिलाफ सडक़ पर नारो गूंजता रहा। अब छत्तीसगढ़ प्रदेश में भाजपा की सरकार काबिज हो गया लेकिन जिस घोटालों को लेकर पिछली सरकार को पछाड़ कर सत्ता में आई कही ऐसा ना हो भाजपा की साय सरकार के ऊपर घोटालो के आरोप लव जाए, सूरजगढ़ का पुल चिक चिक कर कह रहा जहा प्रतिदिन लाखो रूपये की अवैध वसूली हो रही आखिर कौन है इसका जिम्मेदार? किनके संरक्षण में चल रहा प्रतिदिन लाखो की वसूली?

सिर्फ रजिस्टर में दर्ज, आखिर क्या है खेला?

आपको बता दे विगत दिनों पीछे इसी नाका में 100 रुपया की राशिद काटी जाती थी, लेकिन आज 300 से 400 की वसूली किया जा रहा है, जबकि पहले भी 100 रूपये की पर्ची थी ट्रक के लिए आज भी वही 100 रूपये की पर्ची है लेकिन उसी 100 की पर्ची पर 200 से 300 रुपिया अधिक लिया जा रहा अगर पर्ची चाहिए तो 400 देना होगा और उसमे भी आपको 4 पर्ची दिया जायेगा जबकि सूचना बोर्ड में साफ लिखा है कि कृपया टोल नाके पर एक ही पर्ची का भुगतान करे तो आखिर चार पर्ची कैसे दिया जा रहा है? कही ऐसा तो नहीं की एक पर्ची शासन को दिखाने का और बाकी 3 पर्ची ठेकेदार अपनी जेब में डालने का खेला तो नहीं चल रहा? चुनावी दौर में सुना था की ओपी चौधरी जब विधानसभा चुनाव में रायगढ़ विधानसभा में चुनाव लड़ रहे थे तो जगह जगह मंच में सम्बोधन करते थे एक रुपया का भ्रष्टाचार नही चलेगा किसी प्रकार का कोई घूसखोरी और अवैध कार्य नही होगा, जिस तरफ से सूरजगढ़ पुल पथ कर के टेंडर जारी हुआ और ठेकेदार द्वारा पथ कर वसूली हो रहा है बिल्कुल शासन द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क अवैध वसूली किया जा रहा है। टेंडर कब जारी हुआ यह भी प्रश्न चिन्ह बना हुआ है? वाहनों से अतिरिक्त लाखों रुपया का अवैध उगाही करने पर रायगढ़ विधायक वित्त मंत्री ओपी चौधरी क्या कार्यवाही करते है ये भी देखने वाली बात होगी?

टोल कर्मचारियों की दादागिरी से शासन प्रशासन की हो रही किरकिरी

चंद्रपुर गौरव पथ बनने से बड़ी गाडिय़ों का आना जाना अभी बंद कराया गया है और गाडिय़ों को डाइवर्ट कर सरिया सूरजगढ़ भुसावल होकर जाना पड़ रहा है, लेकिन यहां टोल कर्मियों की दादागिरी इस कदर है कि इसकी बयान नहीं कर सकते। दलाल बनकर बैठे हुए वहां कर्मचारी हर गाडिय़ों से 300 से ?400 लिया जा रहा है और शासन प्रशासन है कि मुख दर्शन बन देख रही है। अगर टोल टैक्स में अवैध रूप से वसूली हो रही है तो यह एक प्रकार से गलत है, लेकिन शासन प्रशासन है कि इस पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है और बेधडक़ होकर बहरोक्त इनको छोड़ दिया जा रहा है और गुंडा बनाकर वहां पर आदेशों लिखी जा रही है, लेकिन ना तो स्थानीय पुलिस इस पर कुछ कार्यवाही कर रही है और ना ही जिला प्रशासन द्वारा इस पर संज्ञान लिया जा रहा है। सूरजगढ़ पुल से घूम के जाने से गाड़ी मालिक को नुकसान, ऊपर से यहां की दादागिरी चरण सीमा पर पहले एक ठेकेदार रहा करता था वह कुछ दिनों तक अवैध वसूली किया उसके बाद फिर अभी नया ठेकेदार को दिया गया है, लेकिन यह कई सवालों को जन्म देती है, पहले तो आचार संहिता लगा हुआ है उसके बाद ठेका कैसे हो गया और ठेका कर्मी कैसे बदल गए क्या यहां पर अवैध वसूली धड़क्के से किया जा रहा है? अगर किया जा रहा है तो शासन प्रशासन इस पर क्यों संज्ञान नहीं ले रहा है और विपक्ष में बैठे कांग्रेस के नेताओं को भी इसकी भनक कैसे नहीं है। अगर ऐसा ही रहा तो आने वाला दिनों में शासन प्रशासन की बदनामी होगी और सत्ताधारी नेताओं की तो बदनामी हो ही रही है कि आचार संहिता में कैसे यहां प्रशासन इनको ठेका दे दिया गया है और क्या यह ठेकेदार अवैध वसूली करने के लिए बैठा हुआ है यह तो एक जांच का विषय है।

सूरजगढ़ पुल नाका बना अवैध वसूली का गढ़

आपको बता दे सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरिया ब्लाक से महज 8 से 10 किलो मीटर दूर स्थित सूरजगढ़ पुल से आप सब भली भाती परिचित है जहा पूल पार करते ही वसूली का वो अड्डा पहुच जायेंगे जहा रोज लाखो की अवैध कमाई ठेकेदार और उनके कर्मचारी कर रहे हैं।आपको बता दे पुल के समीप नाका बना हुआ है जिसे लोक निर्माण विभाग द्वारा संचालित किया गया है जहा पथ कर वसूला जा रहा है, जहा नियम तो कुछ और कह रहा है लेकिन चल कुछ और रहा है जिसमें प्राइवेट कार, जीप, पीकप जैसे गाडिय़ों के लिए 20 रुपया शुक्ल, टैम्पू, टैक्सी, मिनीबस जैसे गाडिय़ों से 40 रूपये, खाली ट्रक भरी बस/खाली से 60 रूपये, ट्रैक लोडेड से 80 तो वही मल्टी एक्शल ट्रेलर गाडिय़ों से 100 रूपये लेना है। एक बकायदा निर्देश के रूप में जनहित में बोर्ड लगा हुआ है उसके बाद भी नाका पर ठेकेदार अपनी मन मर्जी चलाकर शासन के निर्देश नीति को दरकिनार कर मनचाहा पैसा वसूल कर रहे है, जहा आज देखा गया कि छोटी बड़ी गाडिय़ों का कतार लगा हुआ था जहा दर्जनों ट्रक चालक से जानकरी मिला की 100 रूपये की पर्ची पर 400 रूपये लिया जा रहा है। यहां तक की वाहन चालकों ने यह भी बताया कि अगर बिना पर्ची का जाना है तो 300 रुपया देकर गाड़ी नाका से पार हो जायेगी। अब जरा सोचिए की किस लेवल का धांधली सूरजगढ़ पुल के नाम पर पथ कर वसूली जारी है।

आचार संहिता में कैसे बदल गया ठेकेदार?

अगर सरकारी काम कोई भी करना हो तो आचार संहिता में पंचायत नहीं कर सकता है तो यहां पर ठेकेदार ही बदल दिया गया है। यह कैसे रायगढ़ जिला और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला में खेला-लीला हो रहा है जो अवैध सूली करने के लिए बैठे हुए हैं और एक गाड़ी अगर पर होता है तो रू. 100 देने को है, लेकिन यहां तो बाकायदा बोर्ड भी टंगा हुआ है कि बड़ी गाडिय़ों का रेट रू.100 है, लेकिन यहां दादागिरी के साथ 300 से रू. 400 लिया जा रहा है। अगर ड्राइवर द्वारा पूछा जाता है कि रू.100 तो लिया जाता है सर करके तो वहां बदतमीजी से बात किया जा रहा है और शासन प्रशासन है कि इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहा है। आखिर ऐसे में शासन प्रशासन पर लोगों का भरोसा उठ गया है, क्या शासन प्रशासन मुख दर्शन बन बैठे हुए हैं या फिर शासन-प्रशासन इस ठेकेदार के आदमी या ठेकेदार को खुला छूट दे रखा है। आखिर कब तक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और कब तक चलेगा यह अवैध वसूली? रायगढ़ कलेक्टर को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए, लेकिन यहां तो खुल्लम-खुल्ला अवैध वसूली का काम चल रहा है।

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Sudhir Chouhan

पत्रकार सुधीर चौहान (संपादक) स्वतंत्र भारत न्यूज़ मो.नं.9098259961

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