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रायगढ़ में ‘खाकी’ का इकबाल खत्म: नशा माफिया का खुला तांडव! नशामुक्ति की आवाज उठाने वाली महिला को सरेआम ‘मौत का फरमान’

“साहब! यह समाज सुधार की सजा है? टीआई की मौजूदगी में हुए फैसले को गुंडे ने ठेंगा दिखाया, दी खुली चुनौती- बाहर से आदमी बुलाकर मरवा दूंगा”

रायगढ़/लैलूंगा : जिले में पुलिस का खौफ अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। लैलूंगा थाना क्षेत्र के ग्राम कोइलारडीह में जो हुआ, वह कानून व्यवस्था के गाल पर एक करारा तमाचा है। यहाँ समाज सुधार की बात करना अब ‘गुनाह-ए-अजीम’ बन गया है। नशामुक्ति की अलख जगाने वाली एक निहत्थी महिला को अवैध नशे के सौदागर सरेआम मौत की धमकी दे रहे हैं और ‘मित्र पुलिस’ शायद किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है।

घटनाक्रम : सिस्टम की नाक के नीचे गुंडाराज – मामला लैलूंगा थाने का है, जहाँ पीड़िता बेलासो (पति चित्रसेन) ने गांव को नशे के जहर से बचाने की जुर्रत की। गांव में अवैध शराब और गांजा बिक्री पर लगाम लगाने के लिए एक ‘जन-चौपाल’ बुलाई गई। विडंबना देखिए कि इस बैठक में तत्कालीन थाना प्रभारी (TI) और समाज के संभ्रांत लोग भी मौजूद थे।

लेकिन मजाल है कि खाकी की मौजूदगी का कोई असर हुआ हो! बैठक के ठीक अगले दिन, 15 जनवरी 2026 की सुबह, आरोपी घोनो यादव महिला के घर आ धमका। उसने न केवल गालियों की बौछार की, बल्कि पुलिस और समाज के फैसलों को अपने जूते की नोक पर रखते हुए ऐलान कर दिया-  “किसने लगाई थी जन-चौपाल? मैं भी देखता हूँ कौन रोकता है धंधा। बाहर से गुंडे बुलवाकर मरवा के फिकवा दूंगा।”

बड़ा सवाल : किसके ‘आशीर्वाद’ से फल-फूल रहा नशा कारोबार?… यह घटना लैलूंगा पुलिस की कार्यशैली पर कई तीखे सवाल खड़े करती है:

* जब जन-चौपाल में थाना प्रभारी खुद मौजूद थे, तो आरोपी के हौसले इतने बुलंद कैसे हुए?

* क्या पुलिस का खुफिया तंत्र इतना फेल है कि उन्हें बौखलाए हुए नशे के सौदागरों की भनक नहीं लगी?

* क्या जान से मारने की धमकी अब पुलिस के लिए महज एक ‘जुमला’ बनकर रह गई है?

*दहशत में परिवार, सिस्टम कुंभकरणी नींद में :* पीड़िता और उसका परिवार दहशत के साये में जीने को मजबूर है। आरोपी ने साफ कहा है कि वह गांजा-शराब बेचने से रोकने वालों को “देख लेगा”। थाने में लिखित आवेदन देने के बाद भी अगर पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, तो किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी किसकी होगी?

*नये कप्तान से आस, थाने से विश्वास खत्म  :* स्थानीय पुलिस की ढुलमुल रवैये से निराश पीड़िता ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। बेलासो ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब जिले के नये पुलिस अधीक्षक (SP) के कार्यभार संभालने के बाद सीधे उनके दफ्तर में गुहार लगाएंगी।

*अब देखना यह है कि क्या रायगढ़ पुलिस अपनी खोई हुई साख बचा पाती है, या फिर कोइलारडीह की यह बेटी भी सिस्टम की फाइलों में एक ‘आंकड़ा’ बनकर रह जाएगी?…*

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Sudhir Chouhan

पत्रकार सुधीर चौहान (संपादक) स्वतंत्र भारत न्यूज़ मो.नं.9098259961

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