
बच्चे को रात में ईलाज के लिए माँ महामाया हॉस्पिटल हसौद में किया गया था भर्ती
सक्ती/हसौद/ अवधेश टंडन। सक्ती जिले के हसौद में गलत इलाज व इंजेक्शन लगाने से 8 वर्षीय करण यादव की मौत हो गई। घटना मंगलवार सुबह करीब 3 बजे की है ,जानकारी के अनुसार हसौद निवासी रामरतन यादव के बेटे करण को सोमवार रात में करीब 8 बजे पेट में तेज दर्द हुआ। दर्द होने के बाद दवाई खिलाने के बाद उसे हसौद के निजी अस्पताल माँ महामाया में लेकर पहुंचे, वहाँ पहुंचने के बाद रात में उसे इलाज के लिए भर्ती किया गया था और करीब चार से पांच घण्टे के बीच वहाँ भर्ती कर अस्पताल में ईलाज किया गया जिसके बाद उसकी अस्पताल में ही मौत हो गई थी मगर अस्पताल पर किसी भी तरह की आंच न आए और न किसी को भनक लगे सोंचकर अस्पताल से बच्चे की हालात गंभीर है करके रेफर करने का प्रयास किया गया , परिजनों को कुछ समझ मे नहीं आया और आखिरकार बच्चे के शव को घर लेकर परिजन गए जिसके बाद आसपास के लोगों को जानकारी हुई तब धीरे धीरे घटना पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई और इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से लेकर कलेक्टर को दी गई , जिसके बाद जांच के लिए हसौद तहसीलदार , बीएमओ जैजैपुर , हसौद थाना प्रभारी परिजन के घर पहुंचे और जांच शुरू की उसके बाद डभरा एसडीओपी भी पहुंचे जिसके बाद परिजनों से पूछताछ कर पंचनामा किया गया और शव को पीएम के लिए भेजा गया साथ ही इस पूरे मामले पर पीएम के बाद कलेक्टर ने जांच टीम गठित की है , जांच टीम द्वारा जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बच्चे के मौत के बाद शव पर होता रहा राजनीति ,जांच करने पहुंचे अधिकारी करते रहे लीपापोती
इस घटना के बाद बच्चे का शव घर में था , घटना की जानकारी के बाद जैजैपुर बीएमओ , हसौद तहसीलदार व पुलिस की टीम पहुंची हुई थी , मगर कई घंटों तक लीपापोती का प्रयास चल रहा था , कलेक्टर के संज्ञान में आने के बाद सही तरीके से जांच कर कार्रवाई करने के आदेश के बाद जांच टीम द्वारा पंचनामा तैयार कर शव को पीएम के लिए भेजा गया और पीएम के बाद आगे जांच की बात कही गई है , मगर सबसे बड़ा सवाल है कि आज घटना के बाद अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई तो दूर उस अस्पताल में जांच टीम झांकने तक नहीं गई , जिससे तरह तरह के सवाल उठ रहे थे , माँ महामाया अस्पताल हसौद की अगर बात की जाए तो वहां आए दिन कुछ न कुछ घटना होती रहती है साथ ही उस अस्पताल में कोई भी डिग्रीधारी डाँक्टर नहीं रहते और न ही उस अस्पताल की लाइसेंस है , यहाँ तक कि वहाँ 12 वीं पास छात्र काम करते हैं उसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग अस्पताल पर मेहरबान है और कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे बैठे हैं।
कलेक्टर ने जांच के लिए किए टीम गठित
घटना पर जिलाधिकारी अमृत विकास तोपनो ने संज्ञान लिया है। उन्होंने जांच टीम को मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।साथ ही, अस्पताल की कानूनी वैधता, संचालक और डॉक्टर की चिकित्सीय योग्यता या लाइसेंस स्थिति की जांच कर नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं।
जानकारी मिली है जांच के निर्देश दिए गए हैं जांच टीम भी गठित की गई है।
अमृत विकास तोपनो
सक्ती कलेक्टर
हमारे यहां कोई इलाज नहीं किया गया है।
नारायण साहू
संचालक महामाया हॉस्पिटल






