
सारंगढ़ बिलाईगढ़:- जिले के बरमकेला में रविवार को जिला स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस त्यौहार मनाया गया। नगर में रैली के साथ कार्यक्रम की शुरुवात हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथी बरमकेला तहसीलदार पुष्पेंद्र कुमार राज थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पी.एल. सिदार जी (अधि.अभि.वि.मं. छ.ग.) ने की।


विशिष्ट अतिथियों में पुष्पराजसिंह बरिहा (प्रान्तीय उपाध्यक्ष), रामनाथ सिदारजी (जिलाध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज सारंगढ़), अविनाश सिदार जी (जिलाध्यक्ष शास. सेवक संघ सारंगढ़), श्रीमती सहोद्रा सिदार जी (जिला पंचायत सदस्य सारंगढ़), श्रीमती बरखा लकड़ा जी (अंतराष्ट्रीय आदिवासी प्रखर वक्ता झारखंड), श्रीमती डॉ. संध्या भोई जी (प्राचार्य स्व. राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह शा. महाविद्यालय सराईपाली)), तेजराम सिदार जी (जिला उपाध्यक्ष सरपंच संघ सारंगढ़), डॉ. योगेश कुमार बरिहा जी (एम.बी.बी.एस), ऋषिकेश भोई (विश्व प्रसिद्ध कलाकार बरगढ़ उड़ीसा), प्रभूनारायण खलखो जी (प्राचार्य सेंट जेवियर स्कूल चांटीपाली), श्रीमती पुनम सिदार जी (उप रजिस्टार सरिया), श्रीमती सुशीला संपत बरिहा (जनपद सदस्य बरमकेला), श्रीमती सुलोचना सिदार (सरपंच मारोदरहा), श्रीमती उर्मिला सिदार जी (पार्षद बरमकेला), श्रीमती शकुन्तला सिदार जी (पार्षद सरिया), श्रीमती प्यारी भगत जी (से.नि. शिक्षिका), श्रीमती रमा मंगलू सिदार (पार्षद बरमकेला) श्री कोलामणी सिदार जी (पार्षद) श्री राजेन्द्र सिदार जी (पार्षद )मौजूद रहे।


जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सहोद्रा सिदार ने कहा कि भाजपा सरकार आदिवासियों के साथ है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का उदाहरण देते हुए आदिवासी नेतृत्व को रेखांकित किया।

विशिष्ट अतिथि श्रीमती डॉ संध्या भोई जी ने महिलाओं को अपने बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने,व हर समस्या का समाधान शिक्षा में है।इस लिए बच्चों को पढ़ाना जरूरी है।विश्व आदिवासी दिवस का मूल उद्देश्य हमारे महापुरुषों के पथ पर चलकर उसका अनुकरण करना है।

सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष पुष्पराज सिंह बरीहा ने कहा कि यह कार्यक्रम समाज को एकजुट करने के लिए आयोजित किया गया। उन्होंने सरकार से समाज के लिए निरंतर सहयोग की अपेक्षा जताई। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के प्रतिभावान बच्चों और अधिकारी-कर्मचारियों का सम्मान किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी कलात्मक प्रस्तुतियां दीं।

तमनार से आये राजेश सिंह मरकाम के कहा हमें जल जंगल जमीन के लड़ाई के लिए सजग रहने की जरूरत है। निरंतर विकास के नाम पर आदिवासियों का ही विनाश हो रहा है। तमनार में हो रहे जंगल कटाई से वहां के आदिवासी लगातार कई महीनों से संघर्ष कर रहे हैं। आदिवासियों के मान सम्मान स्वाभिमान बचाने के लिए सभी आदिवासियों को एक होने की सलाह दी। इस प्रकार आदिवासियों के ऊपर हो रहे अन्याय अत्याचार को बताते हुए कार्यक्रम में ऊर्जा भर दिया।

इस तरह बरमकेला मे 9 अगस्त को रक्षाबन्धन पर्व होने कारण 24 अगस्त को आयोजित कर बड़े ही धूमधाम नांच गान के साथ आदिवासी समाज अपनी इस विश्व प्रसिद्ध कार्यक्रम को मनाया ।

कार्यक्रम को मुख्य रूप से सर्व आदिवासी बरमकेला एवं अ ज जा शासकीय कर्मचारी संगठन बरमकेला एवं वि ख बरमकेला के 15 जनजातीय समाज के हजारों की संख्या में जिसमें से पुसौर रायगढ़ सारंगढ़ डभरा सहित उड़ीसा से समाज के लोग भी शामिल हुए।








