
बरमकेला/सुधीर चौहान:- धान का कटोरा छत्तीसगढ़ में अन्न के दान का सबसे बड़ा पर्व लोक पर्व छेरछेरा पुन्नी आज 6 जनवरी शुक्रवार को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया । आज के दिन को पौष पुन्नी के नाम से भी जाना जाता है छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पुन्नी का अलग ही महत्व है वर्षों से मनाया जाने वाला यह पारंपारिक लोक पर्व नए साल के शुरुआत में मनाया जाता है। महादान और फसल उत्सव के रूप त्यौहार मनाया जाने वाला छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ के सामाजिक समरसता ,समृद्ध, दानशीलता की गौरवशाली परंपरा का संवाहक है। छेरछेरा, माई कोठी के धान ल हेर हेरा बोलते हुए गांव के बच्चे ,युवा, किसान के घर जाकर धान और भेंट स्वरूप प्राप्त पैसे इकट्ठा करते हैं।

डीजे व कीर्तन के साथ निकले छेरछेरा मांगने
इसी तारतम्य में आज बरमकेला क्षेत्र के ग्राम बोईरडीह में भी युवाओं ने हर्ष उल्लास के साथ पुन्नी तिहार मनाया। युवावो ने डीजे के साथ तो बड़े बुजुर्गो ने कीर्तन मंडली के साथ छेरछेरा मांगने घर घर पहुंचे और उन्हें सभी ने छेरछेरा दान भी किया।

छेरछेरा त्योहार में मुख्य रूप से बोईरडीह के सभी युवाओं ने यादव डीजे के साथ तो दोनो कीर्तन मंडलियों ने कीर्तन में नाच गाकर बड़े ही हर्ष के साथ छेरछेरा का पर्व मनाया।






