
जिला कलेक्टर संजय कन्नौजे की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह? मुद्दे को लेकर कार्यवाही की आश्वासन भी नहीं
विगत कई दिनों के खबर प्रकाशनों में यह स्पष्ट और सटीक तौर पर जमीनी हकीकत बयान की गई कि सारंगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खनिज जांच चौकी टिमरलगा में अवैध परिवहन धड़ल्ले से किया जा रहे हैं और इन पर विभाग के द्वारा ना कोई कार्यवाही की जाती है और ना ही इस संदर्भ में माफियाओं पर विभाग किसी भी प्रकार का अंकुश लगा पाई है।
किंतु जमीनी स्तर की हकीकत का आकलन करने पर यह पाया जाता है की माफियाओं के हाथ, विभाग से भी कहीं अधिक सशक्त हो चुके हैं। उनकी गुंडागर्दी और दबंगई टिमरलगा जांच नाका पर बहुत भारी पड़ती है, माफियाओं की राजनीतिक पहुंच, धनबल तथा धमकियों से डरकर अपनी जान बचाने के लिए विभाग के अधीनस्थ कर्मचारी जो की खनिज जांच नाका के कार्यभार पर लगे हुए हैं उन्हें मजबूरी वश ओवरलोड और बिना रॉयल्टी की गाड़ियों को छोड़ना पड़ता है और वे नाका को पार कर लेते हैं।
इतना ही नहीं खनिज क्षेत्र ग्राम गुडेली और टिमरलगा में की जा रही क्रेसिंग और खदानों में किसी भी प्रकार की नीति नियम अथवा मापदंडों के अनुसार कोई भी कार्य नहीं किए जाते हैं। जिसके कारण वहां के रोड पर धूल डस्ट हर समय देखने को मिलते हैं। नियम के मुताबिक ऐसी जगहों पर सड़कों की धूल डस्ट को कम करने के लिए वहां पर पानी का छिड़काव किया जाता है, जो कि यहां पर बहुत कम अथवा ना के बराबर होती है या फिर होती ही नहीं है।
#2. *कार्यवाही न करने की एवज में कलेक्टर संजय कन्नौजे के द्वारा पत्रकारों पर निहित स्वार्थ सिद्धि के लिए अवैध परिवहन और कार्यों का मुद्दा उठाए जाने का आरोप*
इस प्रकार की तमाम अवैध गतिविधियों की जानकारियों को सारंगढ़ कलेक्टर संजय कन्नौजे को साझा करने और कार्यवाही की अपेक्षा करने पर इन मुद्दों को गंभीरता से ना लेते हुए जिला कलेक्टर के द्वारा संबंधित विषय पर किसी प्रकार की जांच की आश्वासन तक नहीं दी जाती। बल्कि पत्रकारों की किसी प्रकार की निहित आपूर्ति न होने के कारण इन सब मुद्दों उठाने का आरोप लगाया जाता है।
ऐसे में यह सवाल उठता है कि नीति नियमों को ताक पर रखते अवैध उत्खनन और खनिज चोरी संबंधी तथा इन जैसे तमाम मुद्दों का उठाया जाना क्या कोई गंभीर मुद्दा नहीं है?
*खनिज माफियाओं और अवैध ट्रांसपोर्टरों को खुली छूट!! और विभाग का अपने कार्यों को लेकर अनदेखी?!*
वहीं जब, सहायक खनिज अधिकारी बजरंग पैंकरा से यह सवाल पूछा गया कि किसी भी गिट्टी लोड वाहन को बिना रायल्टी पर्ची अथवा संबंधित कागजात के पकड़े जाने पर क्या कार्यवाही होती है? तो उनके द्वारा यह बताया गया कि अगर बिना रॉयल्टी की ऐसी कोई वाहन अगर पकड़ी जाती है तो संबंधित गाड़ी वाहन पर छत्तीसगढ़ गौण खनिज अधिनियम 2015 के तहत कार्यवाही की जाती है। और उन्होंने यह भी बताया की वाहन की ऑनलाइन चालान होने पर भी गाड़ी को तुरंत छोड़ने का कोई ऐसा प्रावधान नहीं है।
अगर खनिज जांच चौकी में अवैध परिवहन और नीति नियमों को ताख पर रखकर खदान खोदने तथा क्रेसिंग करने का मुद्दा कोई गंभीर मुद्दा ना हो तो आखिर बिना रायल्टी पर्ची की गिट्टी लोडित वाहनों को छोड़ना विभाग की बड़ी उपलब्धि?
अगर खनिज विभाग अवैध गतिविधियों पर कार्यवाही नहीं कर रहा है, तो क्या खनन और परिवहन माफियाओं को सारंगढ़ खनिज क्षेत्र के अमूल्य खनिज संपदा को लूटने का और छत्तीसगढ़ शासन के करोड़ों के राजस्व चुराने का खुला ऑफर नहीं दे रहा है?






