सार्वजनिक पत्र | चेतावनी; धान समिति प्रबंधकों के नाम — पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार अब बर्दाश्त नहीं

छत्तीसगढ़: राज्य के समस्त धान समिति प्रबंधकों ग्राम / जनपद / जिला / संभाग / यह पत्र किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को आईना दिखाने के लिए लिखा जा रहा है।प्रदेश की कई धान समितियों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जहाँ पत्रकारों के साथ बदसलूकी, अपमान, धमकी और रिपोर्टिंग में जानबूझकर बाधा डाली जा रही है। यह सिर्फ पत्रकारों का अपमान नहीं, बल्कि किसानों की आवाज़, लोकतंत्र और संविधान पर हमला है। यह बात साफ-साफ समझ लीजिए० पत्रकार आपके निजी दुश्मन नहीं हैं।० पत्रकार सवाल पूछने का अपराध नहीं कर रहे।० पत्रकार किसानों के साथ हो रहे व्यवहार को सामने ला रहे हैं। अगर सच में आपकी समितियाँ साफ हैं, तो कैमरे से डर क्यों? आज के दौर में यह भ्रम पालना कि—“यह पत्रकार है या नहीं?”“मान्यता कहाँ है?”० पूरी तरह गलत और गुमराह करने वाली सोच है। सच्चाई यह है कि—छत्तीसगढ़ का जनसंपर्क विभाग किसी को पत्रकार होने का प्रमाण पत्र नहीं देता। आज हर नागरिक के पास कैमरा है, और हर नागरिक सवाल पूछ सकता है। कोई भी समिति प्रबंधक पत्रकार को रिपोर्टिंग से न रोक सकता है, न धमका सकता है।० खुली चेतावनी०यदि भविष्य में किसी भी धान समिति में—पत्रकार से गाली-गलौच मोबाइल या कैमरा छीनना रिपोर्टिंग रोकना धमकाना या धक्का-मुक्की“विज्ञापन बंद करा देंगे” जैसी धमकी की गई, तो इसे व्यक्तिगत विवाद नहीं माना जाएगा, बल्कि—० लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन० प्रेस स्वतंत्रता पर हमला० किसानों की आवाज़ दबाने की साजिश माना जाएगा। और ऐसी स्थिति में मीडिया सम्मान परिवार चुप नहीं बैठेगा। ० नाम उजागर होंगे० वीडियो सार्वजनिक होंगे० जिला, संभाग और राज्य स्तर पर शिकायतें होंगी० कानूनी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ेगा विज्ञापन का भ्रम भी तोड़ लें कोई भी समिति यदि किसी मीडिया संस्थान को विज्ञापन नहीं देना चाहती—तो यह उसका अधिकार है। लेकिन उसी आधार पर पत्रकार को अपमानित करना या डराना कानूनन अपराध है। पत्रकार और समिति प्रबंधक—० दोनों अपने-अपने कार्यों के लिए स्वतंत्र हैं० पर स्वतंत्रता का अर्थ अराजकता नहीं होता ०हमारी स्पष्ट अपील० हम टकराव नहीं चाहते। हम हिंसा नहीं चाहते। हम सिर्फ सम्मान, संवाद और पारदर्शिता चाहते हैं। लेकिन अगर आप समझते हैं कि “पत्रकार कमजोर है” “कोई आवाज़ नहीं उठेगी” तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल होगी।यह पत्र अंतिम शालीन चेतावनी है। इसके बाद हर घटना सार्वजनिक और कानूनी रूप लेगी।*मीडिया सम्मान परिवार, छत्तीसगढ़।






