
0 जिले के अधिकतर पंचायतों में केंद्रीय सहायता राशि की खुलकर बंदरबांट.
0 15वें वित्त राशि गबन का निकाल लिया गया है अजब फार्मूला.
कोरबा/पाली:- गांवों के विकास और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय मद के 15वें वित्त की राशि का ग्राम पंचायत रतखंडी में गजब घोटाला किया गया है। इस मद के लाखों रुपयों की बंदरबांट सरपंच- सचिव ने किया हैं। उक्त राशि के आहरण की भी गजब तोड़ भी निकाल ली गई है। कहा जाता है कि सरकारी धन हड़पने का ऐसा खेल एक अकेले पंचायत में ही नहीं, बल्कि जिले के पांचों जनपद पंचायत के अनेको ग्राम पंचायतों में चलता आ रहा है। यही वजह है कि पांच साल के कार्यकाल में अधिकांश सरपंच खाक से फलक तक जा पहुंचे हैं।
15वें वित्त की राशि में हेराफेरी का एक मामला जनपद पंचायत पाली के ग्राम पंचायत रतखंडी का सामने आया है, जहां बिना कोई काम कराए पांच साल में लाखों रुपए का आहरण सरपंच- सचिव के सांठगांठ से हुआ है। जिसमे से एक नाली निर्माण के नाम पर भी 03 लाख की राशि निकली गई है। सरकारी ऑनलाइन पोर्टल के अनुसार काचरमार बस्ती में लखन घर से तालाब तक एवं मनोज सेठ घर से मनीराम घर तक नाली निर्माण कराने के नाम पर रिचार्ज बाउचर 14 जनवरी 2022 की तिथि में 03 लाख 01 हजार 988 रुपए 15वें वित्त से आहरण का उल्लेख है, जबकि मौके पर जाकर देखने से धरातल पर किसी तरह का नाली नजर नही आया। बता दें कि 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग और आहरण के लिए सरकार की गाइड लाइन के अनुसार यदि किसी पंचायत को 50 हजार से ऊपर का भुगतान करना हो तो उसके लिए तकनीकी स्वीकृति जरूरी होती है। इस योजना में एक विशेष बात यह भी है कि कार्य का जियोटैग जरूरी होता है। दूसरी ओर 15वें वित्त योजना में प्रावधान है कि सरपंच- सचिव को ग्रामसभा में अनुमोदन कराकर ग्राम पंचायत विकास कार्यक्रम में चयनित कार्य को 60- 40 के रेसियो में कराना होता है। इसके तहत स्वच्छता में 30, शिक्षा में 30 व अधोसंरचना में 40 प्रतिशत प्लान के तहत केंद्रीय सहायता राशि 15वें वित्त से ग्राम पंचायत का विकास करना होता है। लेकिन सरपंच- सचिव अपनी मनमानी से मनचाहे हिसाब और खर्च दर्शाकर केंद्रीय और राज्य मद की राशि का बंदरबांट करने में लगे है।
केंद्रीय मद की राशि गबन का गजब तोड़
रतखंडी सरपंच बाबूलाल सोनवानी द्वारा सचिव के सांठगांठ से हेंडपम्प मरम्मत, कच्चा नाला बंधान, स्टेशनरी, सबमर्सिबल पंप- सिन्टेक्स, पाइप लाइन विस्तार, शासकीय भवन छत मरम्मत के नाम पर मूलभूत निधि और 15वें वित्त के लाखों की राशि फर्जी बिल के जरिये निकालकर हजम कर ली है। इसके लिए उन्होंने गजब तोड़ निकली है। इस तोड़ के अनुसार 50 हजार के नीचे की राशि आहरण के लिए न तकनीकी स्वीकृति की आवश्यकता होती है न ही जियोटैग की। ऐसे में पंचायत जवाबदारों ने ज्यादातर 49 हजार, 45 हजार रुपए का आहरण कर गबन किया है। इस प्रकार की राशि पेयजल व्यवस्था के नाम पर 15वें वित्त से सर्वाधिक निकाली गई है। सोचने की बात है कि लाखों की हेराफेरी हो जाती है और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नही लगती। ऐसा कारनामा जिले के अधिकतर पंचायतों में चल रहा है, जहां भ्रष्ट्र सरपंच- सचिव ग्रामसभा में अनुमोदन कराए बिना ही राशि का दुरुपयोग कर रहे है। केंद्रीय जांच एजेंसियां अगर जांच करती है तो यकीनन चौकाने वाले घोटालों का खुलासा होगा।






