
रायगढ़, 11 सितंबर 2025 |
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पुसौर क्षेत्र में एनटीपीसी लारा के खिलाफ स्थानीय सरपंचों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय युवाओं को रोजगार और कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यों में कथित मनमानी को लेकर प्रभावित ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने एनटीपीसी के लोहाखान गेट पर चक्का जाम कर उग्र प्रदर्शन किया। सरपंचों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन में सरपंचों कृष्णा डनसेना, धनेश्वर प्रधान, जयराम पंडा, गोविंद गुप्ता, सुदामा चौहान, राजू सिदार, तरुण प्रधान और हिमांशु चौहान के नेतृत्व में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। आंदोलनकारी एनटीपीसी प्रबंधन पर स्थानीय लोगों की उपेक्षा और जनहित की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं। सरपंचों का कहना है कि एनटीपीसी लारा परियोजना से प्रभावित गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है और सीएसआर कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है।
कृष्णा डनसेना ने प्रदर्शन के दौरान कहा, “एनटीपीसी लारा स्थानीय युवाओं को तुच्छ समझ रहा है। हमारी जमीन और संसाधनों का उपयोग कर ये परियोजना चल रही है, लेकिन हमारे युवाओं को रोजगार और गांवों को विकास के लाभ से वंचित रखा जा रहा है।” धनेश्वर प्रधान ने जोड़ा, “सीएसआर फंड का उपयोग प्रभावित गांवों के विकास के लिए होना चाहिए, लेकिन मनमानी के चलते इसका लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा।”
लोहाखान गेट पर चक्का जाम के कारण एनटीपीसी के परिसर में वाहनों की आवाजाही ठप रही, जिससे प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और व्यापक करेंगे। जयराम पंडा ने स्पष्ट किया, “यह जनहित का मामला है। एनटीपीसी को स्थानीय लोगों के हित में कदम उठाना होगा, वरना यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा।”
स्थानीय युवा सुदामा चौहान ने कहा, “हमें रोजगार चाहिए, सम्मान चाहिए। हमारी जमीन पर बनी परियोजना में हमें दरकिनार नहीं किया जा सकता।” प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने भी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और स्थानीय हितों की रक्षा की मांग दोहराई।
हालांकि, एनटीपीसी लारा प्रबंधन की ओर से इस प्रदर्शन पर तत्काल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इससे पहले भी क्षेत्र में एनटीपीसी के खिलाफ रोजगार और सीएसआर को लेकर विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। क्षेत्रीय सरपंचों का यह आंदोलन एक बार फिर औद्योगिक परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है।
सरपंचों ने प्रशासन से भी इस मामले में हस्तक्षेप कर एनटीपीसी को स्थानीय हितों के प्रति जवाबदेह बनाने की मांग की है।
यह प्रदर्शन तमनार क्षेत्र में औद्योगिक विकास और स्थानीय समुदाय के अधिकारों के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित करता है। एनटीपीसी प्रबंधन अब इस दबाव में कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से जवाब देता है, यह देखना बाकी है। ग्रामीणों और सरपंचों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने हक की लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे।
स्थानीय जनहित के इस मुद्दे पर प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।






