सरकारसामाजिक

CG: जितनी पुरानी सारंगढ़ का इतिहास उतनी ही अधूरा विकास,गौर करने वाली बात..पढ़े पूरी खबर।

सारंगढ़ बिलाईगढ़ – जितनी पुरानी सारंगढ़ का इतिहास है उतनी ही अधूरा विकास है इतिहास जितनी तेजी से बदलता चला गया उतनी ही तेजी से विकास इतिहास के साथ नहीं चल सका और इतिहास बढ़ता हुआ 2025 तक आ गया लेकिन विकास ना जाने कहा किस रास्ते से भटक कर सारंगढ़ से दूर हो गया किसी को नहीं पता चला और अब पता चला ओ बस अफ़सोस ही अफ़सोस! क्या आप भी मानते है जितनी पुरानी इतिहास रहा उतना विकास नहीं हुआ?, क्या आप भी मानते है की सारंगढ़ और बदल सकता था?, क्या आपके भी जहन मे ऐसे सावल आते है अगर आते है तो आप भी उनमे से एक ही जिन्होंने हमेशा सारंगढ़ का विकास चाहा है चलिए जानते है गढ़ो का एक गढ़ सारंगढ़ का चर्चित इतिहास का अधूरा विकास ?

गिरिविलास पैलेस

सारंगढ इतिहास का ओ गढ है जाहा 14 रियासतों में से एक था जाहा के गोड शासक शासन करते थे यह रतनपुर रियासत का शुरु में हिस्सा रहा उसके बाद 18 सम्बलपुर के अधीन हो गया उसके बाद रतनपुर के राजा नरसिह देव व नरेन्द्र साय गोड वस को 84 गाँव का सारंगढ़ को परगना मे दिया! बताया जाता है की सबसे पहले गाताडीह आकर कुछ समय तक रहे और फिर सारंगढ नगर को बसाया गया। इसी तरह सारंगढ़ की शासक गोड वश ने लम्बे समय तक राज किया जिसमे एक नाम राजा नरेश चंद्र भी है 1 जनवरी 1948 को सारंगढ़ रियासत का भरत संघ में विलय हो गया उसके बाद राजा नरेशचंद्र मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक रहे गौर करने वाली बात यह है की कर्मभूमि सारंगढ़ रहा उसके बाद राजनितिक जीवन से सन्यास ले लिए और समाज सेवा मे लग गए लेकिन उनके वंशज पुत्री कमला देवी, रजनीगंधा देवी, विधायक और केबिनेट मंत्री रहे याहा तक की राज परिवार से पुष्पा देकी सिंह कई बार सांसद रही बड़े ही सौभाग्य और गर्व की बात है की सारंगढ़ ने विधायक , सासद, मंत्री. मुख्यमंत्री तक दिया सारंगढ़ का शीर्ष इतिहास रहा फिर भी विकास की पृष्ठ भूमि पर एक नजर फेरे तो आपको सारंगढ़ की प्रगति धुंधली नजर आएगी

सारंगढ़ विकास की धारा – किसी भी देश राज्य या जिला का विकास की अनेक धाराएं है लेकिन मुख्य धारा कुछ ही दृष्टिगत हो पाती है पर्यटन की दृष्टि, धार्मिक दृष्टि,भौगोलिक दृष्टि

आमाकोनी बांध

पर्यटन की दृष्टि – सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला की बात करें तो पर्यटन की दृष्टि से प्राकृतिक की गोद मे हरियाली और कलकल करती झरने से भरपूर हैँ , मड़ोसिल्ली, मकरी, खापान,जैसे अनेको वाटरफल के साथ बड़ी बड़ी डेम केडार, अमाकोनी, किनकारी,जैसे डेम परियोजना हाल ही मे भड़ीसार बांध का भी निर्माण कराया जा रहा लेकिन पर्यटन विकास की दृष्टि से आज भी वैसा के वैसा ही हैँ जैसे पहले कुदरत ने बनाया है ना तो किसी प्राकृतिक जल प्रपात बदल सका और ना ही डेम! पर्यटन की आय रेशियों निकाला जाए तो सारंगढ़ जिला शून्य की चादर ओढ़े बैठा है पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस ओर किसी का कोई ध्यान नहीं गया जबकि पर्यटन उद्योग आय का सबसे बड़ा श्रोत हैँ क्या जितनी भी डेम हैँ उससे यह सभवना लगाई जा सकती है की पर्यटन स्थल के रूप मे सवारा जा सकता था वहां बोटिंग, पिकनिक स्पोर्ट, रेशोर्ट,जैसे अनेक रोमांचक और आकर्षण पार्क के रूप मे भी डबलप किये जा सकते थे

केड़ार डेम

धार्मिक स्थल – अगर धार्मिक स्थल की बात करें तो चारो दिशाओ से प्राचीन मन्दिरे स्थापित हैँ, काली मंदिर, कोशलाई मंदिर कोशिर, नाथलदाई टिमरलगा, कनकबीरा मंदिर, देवसागर का प्राचीन मंदिर, इतने पुराने मंदिर जहाँ हर साल भक्तो की भीड़ आस्था के साथ साल मे महज नवरात्री की नव दिन या महज हप्ते दिन तक उमड़ती है जहाँ सिर्फ दिनों के लिए मार्केटिंग आय अर्जित हो पति है इसे डबलप करने की दिशा मे कोई कदम नहीं उठाया गया जबकि उसी प्राचीन काल की मदिर, रतनपुर,महासमुंद, बिलासपुर,कोरबा रायगढ़, डोंगरगढ़ जैसे अनेको प्राचीन मंदिर कहा से कहा पहुंच गई लेकिन सारंगढ़ आज भी वैसा के वैसा बल्की प्राचीन मंदिर का इतिहास और विशषताये खोती नजर आ रही आप देखिये जहाँ बाकि स्थलों मे छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्की आउट ऑफ़ स्टेट से भी पर्यटक घूमने आते हैँ लेकिन सारंगढ़ मे पर्यटन स्थल के नाम पर पीछे रह गया

कोशलाई मंदिर
काली मंदिर सारंगढ़

भौगोलिक दृष्टि से एक बहुत बड़ा क्षेत्रफल है जहाँ गोमरडा अभ्यारण जहाँ जंगली जानवर वन भैसा, हिरन, साभार, चितल, तेंदुवा, हाथी ने अभी अभी जमाया डेरा बाघ को तो शिकारियो ने मार डाला अभ्यारण मे क्या बदलाव किया जाये आज जहाँ देखो सारे विकास मानव निर्मित हैँ इस ओर भी कोई खास बदलाव या विकास नजर नहीं आता वन विभाग अपने अभ्यारण को wild life भ्रमण की दिशा मे कदम उठाने की आवश्यकता हैँ

गढ़ गई जिला की शुरत रह गई अधूरा विकास की मूरत

50 साल से अधिक वर्षो पुरानी माँग जिला निर्माण का सपना 1 सितम्बर 2022 को अस्तित्व मे आया भूपेश बघेल और उत्तरी जांगड़े ने इस अधूरी सपनो को पूरा किया शायद कांग्रेस की सरकार ना होती या विधायक के तौर पर उत्तरी गणपत जांगड़े ना होती तो यह सपना सपना ही रहा जाता माँग माँग करते ही रह जाते, उम्मीद उम्मीद पर ही टिक जाती हालकी किसी को तो पूरा करना था कांग्रेस ने कर दिया लेकिन जिला बनने से कही ज्यादा महत्वपूर्ण है जिला विकास क्या आप भी जिला विकास से संतुष्ट नहीं?, क्या आपको भी लगता है जिला विकास की गति धीमी है?, क्या आप भी मानते है की उधूरा जिला पूरा हो?, तो आप भी उनमे से है जिन्होंने हर समय जिला को चहुमुखी दिशाओ से विकसित होते देखना चाहते है लेकिन आज भी जिला अधूरा चल रहा जिला तो बन गई लेकिन यहाँ तो आज भी बालोदबाजार और रायगढ़ से कई विभाग संचालित हो रहा आर टी ओ, पर्यावरण,……. जैसे विभाग अब तक पहुंच नहीं पाया और ना ही कोई बड़ी योजना, परियोजना बन पाई, मुडा तालाब अधूरा, सड़के अधूरा, चिकित्सा आज भी रायगढ़ मेडिकल कॉलेज पर आश्रित जहा सोनोग्राफी तक की सुविधा मुहैया ना हो पै, शिक्षा में सरकारी स्कूलो की स्थिती बत से बत्तर होती जा रहीं, कितने क्षेत्र को लिखूं बदहाली अव्यवस्था पढ़ते थक जायेंगे विभिन्न मुद्दे आज भी बस चर्चाओ मे रह गया

जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़

आखिर कौन है जिम्मेदार – अंत में इतना ही कहूंगा जिनके हाथ में रहा पद, पावर, सत्ता की ताकत अगर ओ आपने क्षेत्र जिला की विकास नही सोच पा रहे तो आखिर कौन सोचेगा और कौन है जिम्मेदार, खैर जिम्मेदार जो भी हो पहले और आज अब है चिंतन करने की जरूरत और चर्चित इतिहास की अधुरा विकास गति देने की जरूरत है जय हिन्द जय छत्तीसगढ़ – मुस्कुराइए आप सारंगढ़ में है?

आपको यह पोस्ट कैसा लगा ? समीक्षा जरूर दें!

Click on a star to rate it!

Average rating 0 / 5. Vote count: 0

No votes so far! Be the first to rate this post.

Sudhir Chouhan

पत्रकार सुधीर चौहान (संपादक) स्वतंत्र भारत न्यूज़ मो.नं.9098259961

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button