
रायगढ़, छत्तीसगढ़। 15 मई 2025: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पूंजीपथरा थाना क्षेत्र की मां मनी इंडस्ट्रीज में बीती रात एक बार फिर ‘सुरक्षा’ का शानदार नमूना देखने को मिला। फैक्ट्री में इंडक्शन फर्नेस के फटने से चार मजदूर—अनुज कुमार (35), सुधीर कुमार (47), रामानंद सहनी (40), और संजय श्रीवास्तव (52)—बुरी तरह झुलस गए। दो की हालत इतनी ‘नियंत्रित’ है कि उन्हें रायपुर रेफर करना पड़ा, जबकि बाकी दो जिंदल फोर्टिस अस्पताल में ‘आराम’ फरमा रहे हैं। पूंजीपथरा पुलिस ने अपनी ‘तेजतर्रार’ शैली में जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच भी कागजी शेर बनकर ठंडे बस्ते में जाएगी?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मजदूर रोज की तरह बिना किसी ‘फालतू’ सुरक्षा उपकरणों के काम में जुटे थे, तभी फर्नेस ने ऐसा धमाका किया कि फैक्ट्री में हड़कंप मच गया। गर्म लावा मजदूरों पर इस कदर छिटका कि उनकी जान पर बन आई। उद्योग प्रबंधन की ‘दूरदर्शिता’ का आलम यह है कि सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मजदूरों से जान जोखिम में डलवाने का ‘गौरवपूर्ण’ सिलसिला बदस्तूर जारी है। आखिर, सेफ्टी गियर जैसी ‘बेकार’ चीजों में पैसा क्यों खर्च करना, जब मजदूरों की जान इतनी ‘सस्ती’ है?
पूंजीपथरा पुलिस और श्रम विभाग अब ‘जांच’ के नाम पर अपनी ड्यूटी निभाने में जुट गए हैं। लेकिन रायगढ़ के औद्योगिक इतिहास को देखें, तो ऐसे हादसे और उनकी ‘जांच’ कोई नई बात नहीं। हर बार की तरह, उद्योग विभाग और जिला प्रशासन शायद कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेंगे। मजदूरों के परिवार, जो अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं, उनके लिए शायद ‘मुआवजे’ का लॉलीपॉप थमा दिया जाएगा—वो भी तब, जब मामला ठंडा पड़ जाए।
तो क्या इस बार भी उद्योग प्रबंधन की ‘लापरवाही’ पर सिर्फ दो-चार नोटिस भेजकर बात खत्म हो जाएगी? या फिर जिला प्रशासन और उद्योग विभाग कोई ‘क्रांतिकारी’ कदम उठाएंगे, जैसे कि एक और कमेटी बनाकर जांच को लटकाना? जनता इंतजार कर रही है, क्योंकि रायगढ़ में ‘सुरक्षा’ और ‘न्याय’ का तमाशा अभी खत्म नहीं हुआ है!
मामले का विवरण:
घटना: मां मनी इंडस्ट्रीज, पूंजीपथरा में फर्नेस ब्लास्ट
घायल: अनुज कुमार (35), सुधीर कुमार (47), रामानंद सहनी (40), संजय श्रीवास्तव (52)
स्थिति: दो मजदूर रायपुर रेफर, दो का जिंदल फोर्टिस में इलाज
जांच: पूंजीपथरा पुलिस और उद्योग विभाग की ‘तेजी’ से जारी लेकिन मजदूरों की जान की कीमत और उद्योगों में सुरक्षा की अनदेखी का दर्द उतना ही वास्तविक है।






