
राजिम से रमेश टंडन की रिपोर्ट
राजिम 25 मई। गुरुवार को शाम 4:00 बजे प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री मोना सेन गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के बाद पहली बार राजिम पहुंची और इस उपलब्धि के लिए आभार माना। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि राजिम क्षेत्र में मेरा बचपन बीता है। उन्होंने अनेक गांव का नाम गिनाते हुए कहा कि कार्यक्रमों में कम उम्र की बेटियां जिनके मांग में सिंदूर डाला हुआ तथा बच्चे पकड़े हुए देखती थी तो मुझे अंदर से झगझोरता रहा। कम उम्र में विवाह बंधन ठीक नहीं है इसके लिए हमें कुछ करना चाहिए। कुछ लोगों से बात करने उपरांत मोना सेन डॉट कॉम के नाम से वेबसाइट बनाएं। जिसमें बेटियों के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्प पत्र भरवाने की अपील की गई। देखते ही देखते ढाई लाख से भी अधिक लोगों का सहयोग मिला और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हो गया। इस सफलता का श्रेय बेटियां एवं महिलाओं को है।

खासकर राजिम, फिंगेश्वर, बोरसी तथा पूरे गरियाबंद जिला ने ऑनलाइन संकल्प पत्र प्रस्तुत किया। एक प्रश्न के जवाब में मोना सेन ने कहा कि बेटियों को स्वरोजगार से जोड़ना बहुत जरूरी है इसके लिए मेरा पूरा ध्यान है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के बाद हम और मोटिवेट हो गए हैं। सिलाई कढ़ाई, पार्लर, कोचिंग जैसे कामों से अच्छी आय प्राप्त किया जा सकता है। बेटियां दूसरे पर डिपेंड न रहकर कुछ काम करेगी तो इससे ससुराल को भी मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि मैं खुद 9 बच्चों को गोद लिया हूं उनके सारे खर्चा उठा रही हूं। इनके अलावा समाज की बेटियों को पार्लर का कोर्स फ्री करवा रही हूं। प्रयास है कि इस अभियान से ज्यादा से ज्यादा बेटियां जुड़े।

बेटियों की भी दुनिया है उसे नए सफर का मौका मिले। उन्होंने आगे कहा कि कला के क्षेत्र में भी बहुत बड़ा प्लेटफार्म है। नृत्य, गायन, अभिनय अपने आप में बहुत बड़ा क्षेत्र है इससे जुड़े सफलता आपके कदम चूमेगी। बताना होगा कि आज ही मोना सेन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल से सौजन्य मुलाकात किये तथा उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए बधाई दी उसके बाद सीधे भगवान राजीवलोचन की नगरी राजिम पहुंचकर बेटियों एवं महिलाओं का आभार माना। इस मौके पर उनकी छोटी बहन गुड़िया सेन, अधिवक्ता ओमप्रकाश जोशी तथा अकाश राव मांडले उपस्थित थे।






