कानूनक्राइम

गोबरसिंहा में शासकीय भूमि पर कब्ज़ा; तहसीलदार के आदेश के बाद भी नहीं चली कार्रवाई

आखिर किसके दबाव में रुकी है बुलडोज़र की गूंज, मौन हैं अधिकारी: ग्रामीणों में आक्रोश

सारंगढ़ बिलाईगढ़ बरमकेला ब्लॉक के गोबरसिंहा ग्राम की शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण का मामला अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। तहसीलदार सरिया द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किए जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। न तो कब्जा हटाया गया और न ही जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई। सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि शासन-प्रशासन के अधिकारी आदेश होने के बावजूद भी मौन हैं?

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गोबरसिंहा में जिस भूमि पर गोदाम और मकान का निर्माण किया गया है, वह राजस्व अभिलेखों में “शासकीय भूमि” के रूप में दर्ज है। ग्रामीणों ने इस अवैध कब्जे की शिकायत कई बार तहसील कार्यालय, राजस्व विभाग और कलेक्टर कार्यालय तक की, लेकिन हर बार केवल कागज़ी खानापूर्ति कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

कब्ज़ा प्रमाणित, लेकिन कार्रवाई सिर्फ फाइलों में

राजस्व निरीक्षक और पटवारी की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित भूमि शासकीय है और उस पर निजी निर्माण किया गया है। इस पर तहसीलदार सरिया ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, परंतु आदेश जारी होने के महीनों बाद भी मौके पर बुलडोज़र नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के दबाव में अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। प्रशासन की यह निष्क्रियता ग्रामीणों के बीच असंतोष का कारण बन चुकी है।

ग्रामीणों का आरोप — “प्रभावशाली लोगों पर प्रशासन ढीला”

गांव के लोगों का कहना है कि जब कोई गरीब व्यक्ति छोटी सी झोपड़ी शासकीय भूमि पर बनाता है, तो तत्काल नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाती है, लेकिन जब मामला रसूखदारों का आता है तो प्रशासन की नज़रें झुक जाती हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि यह दोहरा रवैया अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन और प्रशासन दोनों को इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए, वरना ग्रामीण आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

तहसीलदार की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल

इस विषय पर जब मीडिया द्वारा तहसीलदार सरिया से संपर्क किया गया तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब दिया — “मामला विचाराधीन है।”
लेकिन सवाल यह उठता है कि जिस मामले पर आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है, वह अब “विचाराधीन” कैसे हो सकता है? क्या प्रशासन किसी राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है?

शासन की चुप्पी पर जनता का अविश्वास

ग्रामीणों का कहना है कि “जब तहसीलदार के आदेश भी लागू नहीं होते, तब आम जनता कहां जाए?”
लोगों में यह भावना गहराई से बैठ गई है कि अब न्याय केवल कागज़ों पर रह गया है। गोबरसिंहा में अवैध कब्जे का यह मामला प्रशासन की निष्क्रियता का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

मुख्य सवाल जो शासन से पूछे जाने चाहिए

  1. जब भूमि शासकीय है, तो अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  2. तहसीलदार का आदेश किस वजह से अमल में नहीं लाया गया?
  3. क्या अधिकारी किसी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप में हैं?
  4. क्या शासन का कानून केवल कमजोरों पर ही लागू होता है?

निष्कर्ष

गोबरसिंहा की यह घटना केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि यह एक प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है। जब आदेश होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन अपनी नींद से कब जागता है और क्या वाकई बुलडोज़र चलेगा या यह मामला भी फाइलों में धूल खाता रहेगा।

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Sudhir Chouhan

पत्रकार सुधीर चौहान (संपादक) स्वतंत्र भारत न्यूज़ मो.नं.9098259961

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