
लैलूंगा (रायगढ़)। खेती-किसानी के सीजन के बीच जमीन की सीमाओं का स्पष्ट न होना किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। ताजा मामला लैलूंगा तहसील के ग्राम राजपुर से सामने आया है, जहाँ एक किसान अपनी ही जमीन की सही मेड़ और सरहद जानने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।क्या है पूरा मामला? -राजपुर निवासी राकेश कुमार बेहरा (पिता स्व. कीर्तन प्रसाद बेहरा) ने तहसीलदार न्यायालय में एक आवेदन पेश कर अपनी पुश्तैनी जमीन के सीमांकन (Demarcation) की गुहार लगाई है। किसान का कहना है कि सीमा रेखा स्पष्ट न होने के कारण उन्हें कृषि कार्य करने में भारी असुविधा हो रही है और वे अपनी ही जमीन का सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।जमीन का विवरण – आवेदक के पास ग्राम राजपुर में कुल 1.280 हेक्टेयर जमीन है, जिसका विवरण निम्नलिखित है:खसरा नंबर 380/6: रकबा 0.6760 हे.खसरा नंबर 327/2: रकबा 0.6040 हे.कुल किता: 02प्रशासन से मांग : किसान ने छ.ग. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 129 के तहत आवेदन दाखिल किया है। उन्होंने मांग की है कि :हल्का पटवारी (नंबर 03) और राजस्व निरीक्षक (R.I.) लैलूंगा की उपस्थिति में जमीन का विधिवत सीमांकन किया जाए।किसान ने इसके लिए जरूरी सीमांकन शुल्क का भुगतान भी कर दिया है (बैंक चालान क्रमांक J-2277726259)।आवेदन के साथ बी-1, खसरा और आधार कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।”सीमांकन न होने से खेती के काम में बाधा आ रही है। मैंने नियम के मुताबिक शुल्क जमा कर दिया है और अब प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद है।” राकेश कुमार बेहरा (आवेदक)अब गेंद राजस्व विभाग के पाले में है। देखना यह होगा कि लैलूंगा प्रशासन इस आवेदन पर कितनी तत्परता दिखाता है। अक्सर सीमांकन के मामलों में देरी से किसानों के बीच आपसी विवाद बढ़ने की आशंका रहती है, ऐसे में समय पर पैमाइश होना ग्रामीण शांति के लिए भी जरूरी है।






