
सुनो कृष्ण कब तक तरसाओगे?
बताना ऐसे कब तक भरमाओगे?
आँख मिचौली का खेल किया है।
अटूट प्रेम में अपने जोड़ दिया है।
संशय मिटाने अर्जुन सखा बने हो।
धर्म विजय को रणभूमि में तने हो।
भक्ति प्रवाह को राधा रूप दिए हो।
स्थावर जंगम के परित्राण जिये हो।
कल्याणमूर्ति तुम सुदर्शनचक्रधारी।
हो जगतनियन्ता दुष्टदलन दर्पहारी।
कर्मप्रधान हो यह जीवन सिखाया।
परित्राण का सबको मार्ग दिखाया।
गौतम प्रधान ‘मुसाफ़िर’
शनिवार दिनाँक 9 सितम्बर 2023






