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पत्थलगांव का ‘वंडर बॉय’ : जाति बदलने में सुपरमैन, जमीन बदलने में स्पाइडरमैन!

भाग-3

​जशपुर। डार्विन ने कहा था कि इंसान को बदलने में लाखों साल लगते हैं, लेकिन जशपुर के ‘मल्टी-टैलेंटेड’ नरेश कुमार सिदार ने इस थ्योरी को कचरे के डिब्बे में डाल दिया है। नरेश जी ने साबित कर दिया है कि अगर आपके पास ‘सिस्टम’ का आशीर्वाद हो, तो आप सुबह ‘गोंद’ के तौर पर नाश्ता कर सकते हैं और लंच तक ‘उरांव’ बन सकते हैं। यह ‘जातीय गिरगिट’ वाला हुनर ओलंपिक में होता, तो जशपुर के पास आज गोल्ड मेडल होता!

​नियम क्या हैं? बस कागजों की ‘रद्दी’!…​आम आदिवासी अपनी जमीन बचाने के लिए कलेक्ट्रेट की सीढ़ियां घिस देता है, लेकिन नरेश जी के लिए नियम ‘मुगल-ए-आजम’ के अनारकली की तरह हैं- बेचारे दीवारों में चुनवा दिए गए हैं। पत्थलगांव में उन्होंने जमीनों की ऐसी ‘सेंचुरी’ मारी है कि विराट कोहली भी शरमा जाएं। जिस जमीन पर सरकार कहती है ‘सिर्फ खेती होगी’, वहां नरेश जी की कृपा से रातों-रात कंक्रीट के नोट उगने लगते हैं। इसे फर्जीवाड़ा मत कहिए, यह तो ‘लैंड ट्रांसफॉर्मेशन थेरेपी’ है!

​बैंक का ‘वेलेंटाइन डे’ : 28 अगस्त…​रायगढ़ के HDFC बैंक और नरेश जी के बीच जो ‘अटूट प्रेम’ 28 अगस्त 2025 को दिखा, वैसी मोहब्बत लैला-मजनू में भी नहीं थी। बैंक वाले आम आदमी को एक होम लोन के लिए नानी याद दिला देते हैं, लेकिन नरेश जी पर तो वो ऐसे नोट बरसा रहे हैं जैसे किसी शाद‍ी में बाराती। करोड़ों का ‘मॉर्टगेज’ खेल एक ही दिन में खत्म! ऐसा लगता है जैसे बैंक ने अपनी तिजोरी की चाबी नरेश जी के तकिए के नीचे ही रख दी है।

​आयुष और नरेश की ‘जुगलबंदी’ :​इस पूरी स्क्रिप्ट के सह-निर्देशक आयुष अग्रवाल बताए जा रहे हैं। लीक हुए ऑडियो सुनकर तो ऐसा लगता है जैसे ये लोग जमीन नहीं बेच रहे, बल्कि जशपुर का भविष्य ही ‘कमीशन’ पर चढ़ा रहे हैं। इनका ‘खसरा-तंत्र’ इतना पावरफुल है कि बेचारे पटवारी और तहसीलदार भी अपनी उंगलियां दांतों तले दबाए बैठे हैं- शायद इसलिए ताकि कहीं नरेश जी उनकी जाति भी न बदल दें!

​PMO को चिट्ठी : ‘साहब, हमें भी यह जादू सिखा दो!’….​अब जब यह मामला दिल्ली (PMO) तक पहुंच गया है, तो जशपुर की जनता बस एक ही चीज मांग रही है- वह ‘जादुई चश्मा’ जो नरेश जी पहनते हैं। जिससे :

  • ​बंजर जमीन ‘कमर्शियल’ दिखने लगती है।
  • ​आदिवासी एक्ट के कड़े कानून ‘कॉमेडी सर्कस’ बन जाते हैं।
  • ​और इंसान अपनी जाति ऐसे बदलता है जैसे कोई व्हाट्सएप का स्टेटस!

​अंतिम चुटकी : प्रशासन अभी ‘ध्यान मुद्रा’ में है। शायद वो यह रिसर्च कर रहे हैं कि आखिर एक इंसान एक साथ ‘गोंद’ और ‘उरांव’ कैसे हो सकता है? तब तक आप और हम सिर्फ तमाशा देख सकते हैं, क्योंकि नरेश जी की इस ‘अजब’ कहानी के ‘गजब’ मोड़ अभी बाकी हैं!

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Sudhir Chouhan

पत्रकार सुधीर चौहान (संपादक) स्वतंत्र भारत न्यूज़ मो.नं.9098259961

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