
रायगढ़:- वल्ड तैकेन्डो फेड्रेशन ऑफ इंडिया, रायगढ़ टीम के कोच ऋषि सिंह जो खुद भी एक नेशनल इंटरनेशनल और एशियांन चैम्पियनशिप मेडलिस्ट भारत का प्रितिनिधित्व क़ाय बार कर चुके ऋषि एक सेलिब्रिटी कोच और खेलाड़ी है अभी एथलिट/कोच ऋषि के टोटल 38 खिलाडिय़ों ने भाग लिया, जिसमें रायगढ़ के 32 मेडल आए है जिसमे से 4 खिलाडिय़ों का नेशनल के लिए श्लेक्शन हुआ है।
38 खेलाड़ी में से एक एक ऋषि की बहन ऋषिता सिंह है जो गोल्ड मैडल जित कर अपना स्थान नेश्नल में बनाया, और बहुत बड़ी उपलब्धि ऋषि की जोकि एक स्पेशल बच्चा है जो बोल-सुन नही सकता ऐसे बच्चे को भी कोचिंग दे रहे है नाम है कृष्णा दुबे पिता विजय दुबे माता संगीता दुबे के पुत्र है, कृष्णा ने नार्मल फाइटर्सो जो सुनने बोलने में सक्षम है और पुराने बेहतरीन फाइटर्स के साथ फाइट किया और बहुत बेहतरीन प्रदर्शन किया ,
छत्तीसगढ़ ताइक्वांडो संघ के सचिव श्री अनिल द्विवेदी जी ने आने वाले पैराओलम्पिक के लिए कृष्णा का नाम भेजा है । कृष्णा दुबे का । कोच एथलिट ऋषि सिंह का कहना है कि मैं बहुत सारे बच्चों को ट्रेनिग देता हुँ जो उम्र में मेरे से बड़े है और कुछ छोटे भी है मेरे स्टूडेंट्स सभी तारीफ के काबिल है छत्तीसगढ़ और रायगढ को क़ई बार गौरविंत कर मेडल और ट्रॉफी देने बाले खेलाड़ी है मेरे स्टूडेंट । पर कृष्णा की मैं बात करु तो ऊपर वाले ने मुझे आशीर्वाद के रूप में कृष्णा को कोचिंग देने के लिए न्युक्त किया है कृष्णा की खेल और सीखने इक्षाशक्ति के कारण मुझे उसे सिखाने में बहुत साहायता मिलती है बाकी बच्चों से ज्यादा मेहनत और ऐंनर्ज़िटीक है , कृष्णा मुझे वरदान की तरह मिला है, ऊपरवाले ने मुझे बहुत बड़ा टास्क दिए है ओर मैं ईस टास्क को चेलेंज की तरह लेते हुए और कृष्णा मदद से हम ये टास्क जरूर जीतेंगे 100% जीतेंगे , क्यों कि मुझे अपने मेहनत पर ओर कृष्णा के सीखने की जुनून पर पूरीतरह विश्वाश है। प्रथाम टाइकोंडो एकेडमी के
कोच एटलिट् ऋषि सिंह एक एथलिट ओर कई सम्मान से सम्मानित हो चुके है जिसम्मे कुछ इस तरह है वीर वीर विर्षामुण्डा एवार्ड 2 बार, राजीवगांधी अवॉर्ड से मुख्यमंत्री जी के हाँथो सम्मानित ,2 बार गड़तंत्र दिवस पर सम्मानित हो होचुके है, युवा महत्सव सम्मान , खेल सम्मान, राष्ट्रीय, मांनस महोत्सव में उन्हें युवा खेलाड़ी इंटरनेशन विजेता के लिए सम्मान, संस्क्रति मंच सम्मान , अबतक का वेस्टफाईटर ऑफ छात्तीसगढ़ का खिताब ऋषि के पास ही है, बतांना जरूरी है कि एशिया के सब से कम उम्र के कोच भी है ऋषि एक बहुत ही अच्छे और मंजे हुए ट्रेनर है, ऋषि का खेल के प्रति जो प्रेम है वो इस कदर है कि वे अपने प्रथम ताइक़्वान्डो एकेडमि में निशुल्क प्रशिक्षण देने का प्रण लिये है,ऋषि का कहना है जो शुल्क मुझे देंगे वे उसे जमा करें और जब बेल्ट एग्जाम हो या खेलने जाना हो तब वो पैसे को काम मे लें क्यों कि मैंने जो खेल को पैसे के अभाव में खेला है मेरी मम्मी को सहयोग के लिए बाबार समाज सेवियों से बोलते देखा है कम्पनियों को कॉल कर कर के मिन्नतें करते देखा हुँ वो ओर किसी खेलाड़ी के पेरेंट्स के साथ नाहोने पाए पैसे के अभाव में बहुत ही अच्छे खेलाड़ी जो बहुत पहले एशियांनचेम्पियंनशिप का मेडल भारत को दे देते ऐसे ऐसे खेलाड़ी है जो पैसे के अभाव में खेले नही इसलिए मैडल भारत से दूर था अब तक , मैं वो परम्परा खत्म करना चाहताहुँ सलिये निशुल्क ट्रेनिग देनेका मैने सोंचा है, ओर मैं अपने एकेडमि से नायाब हीरे दूंगा अपने भारत माता को मेडल से सजा दूंगा। जैसे मैं हमेशा बोलता हुँ खेल को सही चुने जिस से आपको उस खेलका फायदा मिल सके हर खेल में दो तरह के गेम होते है एक फेड्रेशन ओर एक ओपन,, मान्यता प्राप्त जिसे फेड्रेशन कहते है दूसरा जो मान्यता प्राप्त नही होता जिसे हम ऑपन गेम कहते है, जो आप खेलकर वाहवाही छणिक लेलेंते पर उसका फायदा आपको नही मिलता गेम की कोई मतलब नही , हम इतना खर्च कर के कोई खेम खेलते है तो उससे हमे बेनिफिट तो मिलना चाही ही ना।
Federation
(Recognised by indian olympics committee)
गेम ही खेले ,।
रायगढ़ के खेलप्रेमियों से निवेदन है हर गेम को अपना प्यार और आशीर्वाद दे केवल क्रिकेट को ही नही हम भी बहुत मेहनत कर के फाइट करते है और अपनी जी जान लगाकर फाइट जीतकर मैडल जीतकर आते है ।
मेरे जितने भी फाइटर्स है सभी एक से बढ़ कर एक है पर हाँ कृष्णा दुबे है जिसका पैरा ओलम्पिक के लिए नाम भेजा गया हैं और एक मेरी छोटी बहन ऋषिता सिंह है जिसका नेशन के लिए चयन हुआ है और विशाखापटनम खेलने गई है जो बहुत कम समय मे ही बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर गोल्डमेडल ज़िती है ये दोनों बेहतरीन इलिये है क्यों कि ऋषिता सिंह पहली बार खेली है एकदम फ्रेशर है ओर स्डेड/नेशनल लेवल की खेलाड़ीयों से खेलकर गोल्ड मैडल लगाई है। ओर कृष्णा दुबे जैसे मैने बताया है की बोल सुन नही सकता पर पूरी ताकत और सयंमत के साथ खेल कर नार्मल खेलड़ियों को मात देदेदिया है ,मेरे प्रथम ताईक्वान्डो एकेडमि के बाकी सारे बच्चे गोल्ड मेडलिस्ट है। एक नही दो नही तीन-तीन , चार-चार बार के है, मेरे नवरत्नों में है सारे । मैं पत्रकार बंधुओ का दिल से धन्यवाद करूंगा जिनकी वजह से हमारी प्रतिभा घर-घर और जन-जन तक पहुंच पाता है वर्ना जंगल मे मोर नाचा किसने देखा वाली बात हो जाती अपने रायगढ़ की जनता को धन्यवाद दूंगा जिन्होंने मुझे मेरे जीत कर आने पर प्रेम और आशीर्वाद की झड़ी लगादेते है,और माँ
भारती, छात्तीसगढ़ महतारी और मेरी माँ अल्का सिंह के आशीर्वाद मुझ पर बनी रहे इस से भी बड़े बड़े मैच खेलकर अपने देश का मान सम्मान बढ़ाता रहूंगा ।
अपील -प्रथम ताईकान्डो एकेडमी पर आकर आप प्रशिक्षण लें और खेलके प्रति अपनी रुचि को रूप दें।






