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सफेद सोने की काली हकीकत: जिंदल के कोयले तले कुचली गई ‘इंसानियत’, तमनार पुलिस पर हत्या के संरक्षण का आरोप

रायगढ़। जिले के तमनार क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लोकतंत्र और कानून व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ विकास की आड़ में एक बुजुर्ग को मौत के घाट उतार दिया गया और आरोप है कि यह सब पुलिस की मौजूदगी और संरक्षण में हुआ। ग्रामीणों का गुस्सा अब फूट पड़ा है और उन्होंने सीधे तौर पर जिंदल प्रबंधन और तमनार थाना प्रभारी को इस ‘हत्या’ का जिम्मेदार ठहराया है।

​वर्दी के साये में ‘कत्ल’: मौत का पूरा घटनाक्रम –​ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत लिखित शिकायत के अनुसार, यह कोई साधारण सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा है :

तमनार-आवेदन-12-जनवरी-26
  • ​तारीख: 27 दिसंबर 2025।
  • ​स्थान: खुरूसलेंगा मार्ग, तमनार।
  • ​घटना: थाना प्रभारी कमला पुसाम ठाकुर और एसडीओपी अनिल विश्वकर्मा की मौजूदगी में पुलिस बल ग्रामीणों के धरने को बलपूर्वक हटा रहा था।
  • ​क्रूरता: आरोप है कि पुलिस 35-40 महिलाओं और पुरुषों को बेरहमी से घसीटकर थाने भेज रही थी। इसी अफरा-तफरी के बीच, पुलिस संरक्षण में निकल रहे एक कोयला वाहन (ओ.डी.-16 बी-5096) ने खुरूसलेंगा के एक बुजुर्ग को बुरी तरह कुचल दिया।
  • ​अंजाम: उस बुजुर्ग ने तड़पते हुए 4 जनवरी 2026 को दम तोड़ दिया।

​”मौत का सौदागर” बना प्रशासन? –​ग्रामीणों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तमनार थाना प्रभारी और अन्य राजस्व अधिकारियों ने एक ‘संस्था विशेष’ (जिंदल प्रबंधन) से आर्थिक लाभ लेकर कोयला लदे वाहनों को जबरन निकलवाने का ठेका लिया था। शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि पुलिस ने जिंदल के हितों के लिए ग्रामीणों की जान को जोखिम में डाला।

​आंदोलन को कुचलने की ‘फिक्सिंग’ :​रिपोर्ट के मुताबिक, जब बुजुर्ग की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ा, तो उसे दबाने के लिए एक और घिनौनी साजिश रची गई :

  • ​सुनियोजित हिंसा: ग्रामीणों का आरोप है कि जिंदल पावर लिमिटेड ने अपने ही ‘प्लांटेड’ व्यक्तियों से तोड़फोड़ और आगजनी कराई ताकि पूरे किसान आंदोलन को हिंसक घोषित किया जा सके।
  • ​फर्जी जनसुनवाई: इस पूरे विवाद की जड़ 8 दिसंबर को हुई वह फर्जी जनसुनवाई है, जिसे अधिकारियों ने ग्रामीणों से छिपाकर एक सामुदायिक भवन के पीछे चुपचाप निपटा दिया था।

​अब आर-पार की लड़ाई :​ग्राम टांगरघाट, आमगाँव और बिजना सहित दर्जनों गांवों के सरपंचों और ग्रामीणों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वे झुकेंगे नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और मानवाधिकार आयोग से मांग की है कि :

  • ​बुजुर्ग की मौत के मामले में थाना प्रभारी और दोषी अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज हो।
  • ​फर्जी जनसुनवाई के आधार पर लिए गए फैसलों को रद्द किया जाए।
  • ​पेशा (PESA) कानून का उल्लंघन करने वाले जिंदल प्रबंधन पर कड़ी कार्यवाही हो।

​ग्रामीणों की चेतावनी : “हमारे पास पुलिस की बर्बरता के वीडियो फुटेज और पुख्ता सबूत हैं। अगर दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो यह आंदोलन दिल्ली तक गूंजेगा।”

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Sudhir Chouhan

पत्रकार सुधीर चौहान (संपादक) स्वतंत्र भारत न्यूज़ मो.नं.9098259961

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