
कुड़ेकेला। एसईसीएल के प्रस्तावित खदान विस्तार को लेकर क्षेत्र में विरोध तेज हो गया है। आगामी मंगलवार को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले प्रभावित एवं विस्थापित ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को लगातार हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण धरना-प्रदर्शन में डटे रहे। ग्रामीणों के विरोध के चलते अब तक जनसुनवाई स्थल पर तैयारियां शुरू नहीं हो पाई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि खदानों के विस्तार के नाम पर वर्षों से उनकी जमीन, मकान और प्राकृतिक संसाधनों पर असर पड़ रहा है, लेकिन उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और अधिकार नहीं मिल पाए हैं। ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन पर वादों के अनुरूप काम नहीं करने का आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।बारिश में भी नहीं डिगा ग्रामीणों का विरोधशुक्रवार को क्षेत्र में भारी बारिश के बीच प्रभावित परिवारों ने प्रदर्शन किया। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नजर आए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं किया जाता, तब तक खदान विस्तार का विरोध जारी रहेगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन गतिविधियों के कारण क्षेत्र में धूल, धुआं, प्रदूषण और पेयजल जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। उनका कहना है कि उनकी जमीन से निकलने वाले कोयले से देश को ऊर्जा मिल रही है, लेकिन प्रभावित परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने रखी 10 सूत्रीय मांगें
प्रभावित एवं विस्थापित ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन के सामने अपनी 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—- पुनर्वास और मुआवजा: जमीन एवं मकानों का दोबारा निष्पक्ष सर्वे कर उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था।- स्थायी रोजगार: प्रत्येक प्रभावित परिवार के कम से कम एक सदस्य को स्थायी रोजगार देने की मांग।- सड़क और परिवहन: खराब सड़कों का निर्माण तथा स्कूली बच्चों के लिए बस सुविधा।- पेयजल और बिजली: स्वच्छ पेयजल एवं निर्बाध बिजली की व्यवस्था।- स्वास्थ्य सुविधा: प्रभावित क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग।- शिक्षा: प्रभावित क्षेत्र के बच्चों के लिए बेहतर स्कूल एवं छात्रवृत्ति की व्यवस्था।ग्रामीणों का कहना है कि ये मांगें वर्षों से चली आ रही समस्याओं से जुड़ी हैं और इन पर केवल आश्वासन के बजाय जमीन पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।
मंगलवार की जनसुनवाई को लेकर बढ़ी चिंता
आगामी मंगलवार को प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर अब स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों का विरोध तेज होने से प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के सामने चुनौती बढ़ गई है।ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों पर ठोस पहल किए बिना वे खदान विस्तार का समर्थन नहीं करेंगे। ऐसे में अब देखना होगा कि जनसुनवाई से पहले एसईसीएल प्रबंधन और प्रशासन ग्रामीणों के साथ संवाद कर कोई समाधान निकाल पाता है या नहीं।फिलहाल मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र में स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।






