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रायगढ़ में करोड़ों की विवादित जमीन पर कब्जे का आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप; गणेश अग्रवाल का नाम आने से बढ़ी चर्चा

न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बीच मलबा डंपिंग और बाउंड्रीवॉल निर्माण पर उठे सवाल, पीड़ित ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की

रायगढ़। छतामुड़ा-बांजीपाली हल्का सीमा क्षेत्र में नेशनल हाईवे से कांशीराम चौक की ओर जाने वाली बेशकीमती जमीन पर कथित अवैध कब्जे और मलबा डंपिंग का मामला गरमा गया है। जमीन के स्वामित्व और खसरा नंबरों को लेकर विवाद के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। वीडियो में मौके पर मौजूद एक युवक कथित तौर पर जमीन पर मलबा खाली कराने के संबंध में एक व्यक्ति का नाम लेते हुए दिखाई दे रहा है। हालांकि, वीडियो में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

वायरल वीडियो में युवक ने लिया गणेश अग्रवाल का नाम

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कुछ स्थानीय लोग मलबा डंपिंग कर रहे एक युवक से पूछताछ करते नजर आते हैं। इस दौरान युवक कथित तौर पर खुद को नौकर बताते हुए कहता है कि उसे सेठ ने मलबा खाली कराने के लिए कहा है। वीडियो में वह सेठ का नाम गणेश अग्रवाल बताता है और हांडी चौक का उल्लेख करता है। युवक यह भी कहता है कि उसे जमीन के मालिक और खसरा नंबर की जानकारी नहीं है।

वीडियो में सामने आए इस कथित बयान के बाद मामले में संबंधित व्यक्ति की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति की संलिप्तता या अपराध साबित नहीं होता। इस संबंध में संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान और प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होगी।

खसरा नंबर 155/2, 155/1ख और शासकीय भूमि 156 को लेकर विवाद

मामले में खसरा नंबर 155/2, 155/1ख और शासकीय भूमि के रूप में बताए जा रहे खसरा नंबर 156 का उल्लेख किया गया है। पीड़ित किसान फतेहचंद पटेल की शिकायत के अनुसार, जमीन के रिकॉर्ड और हल्का सीमाओं से जुड़े विवाद के बीच शासकीय भूमि पर कथित कब्जे की आशंका जताई गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक ही खसरा नंबर को अलग-अलग हल्कों में दर्शाए जाने के कारण जमीन की वास्तविक स्थिति और सीमांकन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इन आरोपों की पुष्टि राजस्व अभिलेखों, नक्शे, सीमांकन रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामला न्यायालय में विचाराधीन, फिर भी निर्माण गतिविधियों पर सवाल

बताया जा रहा है कि जमीन से संबंधित विवाद तहसील न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में मौके पर बाउंड्रीवॉल निर्माण और मलबा डालने की गतिविधियों को लेकर शिकायतकर्ता एवं स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं।

यदि न्यायालय में मामला लंबित रहने के दौरान विवादित जमीन पर निर्माण या कब्जे की गतिविधियां हुई हैं, तो प्रशासन को संबंधित आदेशों, जमीन की वर्तमान स्थिति और राजस्व अभिलेखों की जांच करनी चाहिए। यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि संबंधित भूमि निजी है या शासकीय तथा मौके पर किए जा रहे निर्माण की वैधानिक स्थिति क्या है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

वायरल वीडियो और जमीन विवाद को लेकर स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। शिकायतकर्ता पक्ष चाहता है कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कर जमीन का सीमांकन कराए और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण करे।

प्रमुख मांगें हैं—

  • वायरल वीडियो की सत्यता की तकनीकी जांच कराई जाए।
  • संबंधित खसरा नंबरों और हल्का सीमाओं के राजस्व रिकॉर्ड की जांच हो।
  • शासकीय भूमि पर कथित कब्जे और मलबा डंपिंग की स्थिति स्पष्ट की जाए।
  • न्यायालय में लंबित प्रकरण से जुड़े आदेशों की समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
  • वीडियो में नामित व्यक्ति सहित संबंधित लोगों की भूमिका की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाए।

अब प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें

करोड़ों रुपये मूल्य की बताई जा रही इस विवादित जमीन के मामले में अब राजस्व विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका अहम मानी जा रही है। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की पुष्टि, जमीन का वास्तविक सीमांकन और शासकीय भूमि की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

डिस्क्लेमर: यह समाचार शिकायत में लगाए गए आरोपों और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में किए गए कथित दावों पर आधारित है। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। संबंधित पक्षों का जवाब और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आने पर समाचार को अद्यतन किया जाना चाहिए।

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Sudhir Chouhan

पत्रकार सुधीर चौहान (संपादक) स्वतंत्र भारत न्यूज़ मो.नं.9098259961

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