सड़क या मज़ाक इधर बन रही डामर की चादर उधर उखड़ रही विकास की पोल

कुड़ेकेला :- विकास के नाम पर सरकारी पैसों का बंदरबांट इस तरह की सब के आंखे पैसे के आगे गुडवत्ता को लेकर बन्द छाल क्षेत्र के खेदापाली पत्ता गोदाम से लाला माता मंदिर के बीच बन रही ढाई किलोमीटर की सड़क भ्रष्टाचार और लापरवाही की जीती जागती मिसाल बन चुकी है। आलम यह है कि एक तरफ ठेकेदार के मजदूर सड़क चमका रहे हैं तो दूसरी तरफ चंद घंटों में ही वह सड़क खुद ब खुद दम तोड़ रही है। जनता हैरान है कि यह सड़क बनाई जा रही है या सिर्फ सरकारी खजाने को चूना लगाने का खेल चल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एसईसीएल संधारित इस 2.5 किलोमीटर की सड़क निर्माण की जिम्मेदारी विभागीय गाइडलाइन के तहत तय की गई है। नियम कहते हैं कि यहाँ 50 mm कॉम्पैक्ट और 20 mm सीलकोट का कड़ा मापदंड अपनाना है। लेकिन धरातल पर सच इसके बिल्कुल उलट है। ठेकेदार की मनमानी इस कदर हावी है कि निर्माण में गुणवत्ता को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। सड़क इतनी कमजोर और घटिया सामग्री से बन रही है कि महज चंद दिनों के भीतर ही डामर की परतें उखड़ने लगी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क गाड़ियों का बोझ क्या संभालेगी यह तो चलने भर से टूट रही है।राजेश अग्रवाल का अनुबंध ऋतिक गोयल के भरोसे खेल बताया जा रहा है कि इस सड़क निर्माण कार्य का मुख्य अनुबंध राजेश अग्रवाल के नाम पर है। लेकिन मैदान में कहानी कुछ और है यहाँ पेटी पर ऋतिक गोयल नामक व्यक्ति द्वारा धड़ल्ले से कार्य कराया जा रहा है। पेटी पर काम देने और लेने के इस खेल में असली बलिहारी सड़क की गुणवत्ता की हो रही है। अपनी जेबें भरने की होड़ में जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे को तार तार किया जा रहा है।*साहब नदारद ठेकेदार बेलगाम*:-इस पूरे महा लापरवाही के खेल में सबसे बड़ा सवाल विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर खड़ा होता है। नियमानुसार निर्माण कार्य के दौरान विभागीय इंजीनियर या जिम्मेदार अधिकारी का मौके पर मौजूद रहना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ अंधेर नगरीचौपट राजा वाली स्थिति है।निर्माण स्थल से अधिकारी पूरी तरह गायब हैं।अधिकारियों की इसी रहस्यमयी चुप्पी और अनुपस्थिति का फायदा उठाकर ठेकेदार अनियमितता की चरम सीमा पार कर रहा है।बिना किसी डर और रोक टोक के धड़ल्ले से घटिया निर्माण को अंजाम दिया जा रहा है।जनता में आक्रोश जांच की मांगसड़क बनते ही टूटने के इस लाइव नजारे को देखकर छाल क्षेत्र के ग्रामीणों और राहगीरों में आक्रोश है। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि यह ठेकेदार और अधिकारियों की जुगलबंदी का नतीजा है।






