
कापू। थाना कापू क्षेत्र के ग्राम समनिया में जमीन और घर आने-जाने के रास्ते को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद ने एक बार फिर हिंसक रूप ले लिया। मामले में एक पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने 10 नामजद लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता का अपने पड़ोसी परदेशी बघेल के परिवार के साथ जमीन एवं रास्ते को लेकर करीब दो वर्षों से विवाद चल रहा है। इसी विवाद को लेकर पूर्व में भी दोनों पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं तथा मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया गया है।शिकायतकर्ता का आरोप है कि 10 अगस्त 2026 की सुबह करीब 7:30 बजे वह अपने परिवार के साथ घर पर था। इसी दौरान बिनोद बघेल, राकेश बघेल, रोशन बघेल, मालिक राम बघेल, राजेश बघेल, करिश्मा बघेल, मीना बघेल, अंशु बघेल, सरिता बघेल और पदमा बघेल एक राय होकर उसके घर पहुंचे और कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपितों ने घर की परछी एवं आंगन में घुसकर हाथ-मुक्का, डंडा, चाकू तथा लोहे के रॉड जैसे हथियारों से मारपीट की। इस दौरान शिकायतकर्ता के पिता बसंत सक्सेना को हाथ, पैर, सिर एवं हथेली सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों में चोट लगने की बात कही गई है। वहीं उसकी मां इतवारिन बाई के सिर और दाहिने हाथ की कलाई पर भी डंडे से चोट पहुंचाने का आरोप है।वहीं शिकायतकर्ता ने स्वयं भी मारपीट में घायल होने का आरोप लगाया है। उसके अनुसार रोशन बघेल और विनोद बघेल ने हाथ-मुक्का तथा कथित रूप से लोहे के रॉड से हमला किया, जिससे उसके बांये हाथ की भुजा, सिर और पीठ में चोट आई। इसके अलावा अन्य नामजद आरोपितों द्वारा भी हाथ-मुक्का से मारपीट किए जाने का आरोप शिकायत में लगाया गया है। घटना के संबंध में शिकायतकर्ता ने नोनी बाई कुर्रे और चंदा राजे को जानकारी देने की बात कही है। शिकायत के आधार पर थाना कापू पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। प्रकरण की कायमी की सूचना JMFC न्यायालय, धरमजयगढ़ को भेजे जाने की बात भी पुलिस अभिलेख में दर्ज है।बहरहाल पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 191(2), 191(3), 296, 115(2), 351(3), 118(1) एवं 126(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।फिलहाल जमीन एवं रास्ते के पुराने विवाद से जुड़े इस मामले में पुलिस द्वारा घटनाक्रम, आरोपों और चोटों से संबंधित तथ्यों की जांच की जा रही है। और समाचार में लगाए गए आरोप शिकायत में दर्ज कथनों पर आधारित हैं, आरोपों की पुष्टि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।






