नावपारा में मुक्तिधाम की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश

कुड़ेकेला/रायगढ़। छाल तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत नावपारा में मुक्तिधाम की शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षित रखी गई जमीन पर मकान, दुकान और गोदाम जैसे निर्माण किए गए हैं। जिला प्रशासन से लिखित शिकायत किए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक, शिकायत सौंपे एक पखवाड़े से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आई है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि मुक्तिधाम की बची हुई जमीन पर निर्माण की तैयारी की जा रही है और इसके लिए ईंट व रेत जैसी निर्माण सामग्री भी जमा की गई है।
पंचायत भवन में विवाद के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचा मामला
मुक्तिधाम की जमीन पर कथित कब्जे को लेकर गांव में पहले भी विवाद की स्थिति निर्मित हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, इस मुद्दे पर ग्राम पंचायत नावपारा के भवन में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच बहस हुई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने मामले की शिकायत रायगढ़ जिला प्रशासन से करते हुए हस्तक्षेप की मांग की।
ग्रामीणों को उम्मीद थी कि शिकायत मिलने के बाद राजस्व विभाग मौके पर जांच करेगा और भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि शिकायत के बाद भी निर्माण गतिविधियों पर रोक नहीं लगी है।
मुक्तिधाम की जमीन पर कब्जे से भविष्य की चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम गांव की सार्वजनिक और संवेदनशील भूमि है, जिसका उपयोग अंतिम संस्कार के लिए किया जाता है। ऐसी जमीन पर यदि अतिक्रमण होता है, तो आने वाले समय में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए जगह की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने राजस्व विभाग से भूमि का सीमांकन कराने, राजस्व अभिलेखों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा अतिक्रमण की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो विवाद और गहरा सकता है।
प्रशासनिक कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि मामले में देरी होने से कथित अतिक्रमण और निर्माण की स्थिति आगे बढ़ सकती है।
हालांकि, जमीन के स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड और कथित अतिक्रमण की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक जांच एवं संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। मामले में जिला प्रशासन और राजस्व विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
मुक्तिधाम की जमीन को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द मामले की जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
अब निगाहें रायगढ़ जिला प्रशासन और छाल तहसील के राजस्व अमले पर टिकी हैं। देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत पर कब तक जांच और कार्रवाई होती है तथा नावपारा में मुक्तिधाम की जमीन को लेकर जारी विवाद का समाधान कैसे निकलता है।






