
जमींदार परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा के साथ शुरू हुई माँ दुर्गा की आराधना, क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए की गई प्रार्थना
डोंगरीपाली। जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के वनांचल क्षेत्र डोंगरीपाली में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ अम्बे भवानी की भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना के शुभारंभ पर निकाली गई भव्य कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। माता रानी के जयकारों और भक्तिमय वातावरण से पूरा क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर नजर आया।
डोंगरीपाली में माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस धार्मिक आयोजन में जमींदार परिवार की विशेष भूमिका रहती है। परंपरा के अनुसार, दुर्गा पूजा का शुभारंभ जमींदार परिवार के निवास से कलश यात्रा निकालकर किया जाता है। इसके बाद यात्रा बाजार चौक पहुँचती है, जहाँ माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है।
कलश यात्रा में कोठखोल क्षेत्र सहित आसपास के विभिन्न गाँवों से सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं की सहभागिता, माता रानी के जयकारों और धार्मिक उत्साह ने आयोजन को भव्य रूप प्रदान किया। पूरे मार्ग में भक्तिमय माहौल देखने को मिला और श्रद्धालुओं ने माँ अम्बे भवानी के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा एवं आस्था प्रकट की।

इस अवसर पर डोंगरीपाली के जमींदार पुष्पराज सिंह बरिहा एवं उनकी धर्मपत्नी परिणीता सिंह बरिहा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कलश स्थापना कर विधि-विधान से माँ अम्बे भवानी की पूजा-अर्चना की। साथ ही गाँव सहित समूचे क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। जमींदार परिवार की सहभागिता से वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
माँ अम्बे भवानी की आराधना का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव और सामूहिक सहभागिता का भी प्रतीक है। हर वर्ष नवरात्रि के दौरान क्षेत्र के श्रद्धालु एकत्रित होकर माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और परिवार, गाँव तथा पूरे क्षेत्र के मंगलमय भविष्य की कामना करते हैं।
डोंगरीपाली में आयोजित इस भव्य धार्मिक कार्यक्रम में आसपास के गाँवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। माँ दुर्गा के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। आस्था, परंपरा और भक्ति से ओतप्रोत यह आयोजन क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का केंद्र बना रहा।
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