
बसना:-अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में न्यूरो सर्जन डॉक्टर वैभव धवली एवं टीम ने 31 वर्षीय युवक के मस्तिष्क में घुसे लोहे के खीले को आपातकालीन सर्जरी द्वारा सफलतापूर्वक निकाला गया।
दुर्घटना के दौरान लोहे का खीला सिर के पिछले हिस्से से कपाल को भेदते हुए मस्तिष्क के अंदर तक पहुंच गया था। चोट लगने के दो दिन बाद मरीज दृष्टि संबंधी समस्या लेकर अग्रवाल नर्सिंग होम, बसना पहुंचा।
CT Scan में पाया गया कि खीला मस्तिष्क के अत्यंत संवेदनशील भाग में फंसा हुआ था, जहां दृष्टि नियंत्रित करने वाले केंद्र तथा महत्वपूर्ण रक्त वाहिनियां स्थित होती हैं। किसी भी प्रकार की चूक से गंभीर ब्रेन हेमरेज, स्थायी दृष्टिहानि अथवा जान का खतरा हो सकता था।
न्यूरोसर्जन डॉ. वैभव धवली एवं विशेषज्ञ ट्रॉमा टीम द्वारा तत्काल आपातकालीन ऑपरेशन कर खीले को सुरक्षित निकाला गया।
✅ मरीज की दृष्टि पूर्णतः सुरक्षित रही
✅ कोई गंभीर न्यूरोलॉजिकल क्षति नहीं हुई
✅ मरीज पूर्णतः स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटा
यह सफलता केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जो जटिल न्यूरोसर्जरी और ट्रॉमा उपचार कभी केवल बड़े शहरों तक सीमित माने जाते थे, वे अब बसना जैसे छोटे कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं आधुनिक सुविधाओं के साथ उपलब्ध हैं।
यह हमारे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और गौरव का विषय है कि गंभीर दुर्घटनाओं, ब्रेन एवं स्पाइन ट्रॉमा जैसी आपातकालीन स्थितियों में अब मरीजों को दूर महानगरों की ओर नहीं भागना पड़ता।
अग्रवाल नर्सिंग होम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, बसना विशेषज्ञ डॉक्टर • अत्याधुनिक सुविधाएं • 24×7 इमरजेंसी सेवाएं
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पोस्टर हेडलाइन (बड़े अक्षरों में)
“ब्रेन में घुसे लोहे के खीले को सफलतापूर्वक निकाला”
सब-हेडलाइन
“उच्च जोखिम वाली आपातकालीन न्यूरोसर्जरी ने बचाई मरीज की दृष्टि और जीवन”







