
रायगढ़। जानकी कॉलेज ऑफ एजुकेशन धनुहारडेरा रायगढ़ में विगत दिनांक 14 सितंबर 2023 को संस्था के अध्यक्ष शिरीष शारडा,डायरेक्टर श्रीमती तृप्ति अग्रवाल के संरक्षण, दिशा निर्देश से एवं प्राचार्य डॉ गजेंद्र चक्रधारी के मार्गदर्शन में हिन्दी दिवस का आयोजन किया गया। इस पावन सुअवसर के मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध साहित्यकार ,समाज सेवी एवं काव्य वाटिका के अध्यक्ष श्रीमती आशा मेहर “किरण” रायगढ़ थी वही विशिष्ट अतिथि के रूप में ख्यातिलब्ध आर्टिस्ट,चित्रकार ,डिजाइनर, कैलीग्राफर, विजुलाइजर, साहित्यकार एवं समाज सेवी राष्ट्रीय कवि संगम के अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव थे।समारोह कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि,डायरेक्टर मैम,प्राचार्य स्कूल प्रभारी ,कार्यक्रम प्रभारी,द्वारा विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर किया गया। अतिथियों का स्वागत अभिनंदन पुष्प गुच्छ भेंट कर किया गया अभिनंदन क्रम में स्वागत गीत की सुमधुर प्रस्तुति बी एड द्वितीय वर्ष के छात्राओं द्वारा दी गई।

नुक्कड़ नाटक का उत्कृष्ट मंचन, भाषण में हिंदी भाषा के समृद्ध सफर का उल्लेख
हिंदी दिवस समारोह में हिंदी भाषा को समर्पित हिंदी दिवस पर आधारित भाषण एवं नुक्कड़ नाटक का आयोजन प्रतियोगिता स्वरूप किया गया। नुक्कड़ नाटक द्वारा छात्र प्रतिभागियों ने हिंदी भाषा के उत्पत्ति से लेकर समृद्ध भाषा बनने तक के सफर उसकी महत्ता और गहनता को विस्तार से कुशलता पूर्वक मंचन किया। वहीं भाषण में हिंदी के प्रासांगिकता पर प्रतिभागी छात्र छात्राओं ने ओजस्वी संवाद किया। भाषण प्रतियोगिता में संयुक्त रूप से प्रथम बिंदिया गुप्ता (बीएससी अंतिम वर्ष) एवं शशिभूषण प्रधान (बीएड द्वितीय वर्ष) ,द्वितीय स्थान निशा डनसेना (बीएड द्वितीय वर्ष), तृतीय स्थान लिपाक्षी सा (बी एससी अंतिम वर्ष) ने प्राप्त किया।
वही नुक्कड़ नाटक में बीएड द्वितीय वर्ष के माधुरी सिदार ,बेबी पटेल,सत्यवती प्रधान,सरिता भगत, सलीता भगत, भारती निषाद,रेवती राठिया, रेवती पटेल ,निशा पटेल,मिथिला बरीहा,लक्ष्मण बरीहा, सरोज साव को उत्कृष्ट प्रस्तुति हेतु प्रथम स्थान पर चुना गया। स्थान प्राप्त प्रतिभागी छात्र छात्राओं को मुख्य अतिथि श्रीमती आशा मेहर किरण विशिष्ट अतिथि श्री मनोज श्रीवास्तव ,एवं डायरेक्टर श्रीमती तृप्ति अग्रवाल एवं प्राचार्य द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
हिंदी दिवस समारोह में उद्बोधन क्रमानुसार महत्वपूर्ण वक्तव्य उद्धृत हुआ ।

पूर्ण वैज्ञानिक भाषा है हिंदी: सीताराम
हिंदी के सहायक प्राध्यापक सीताराम कैवर्त्य ने हिंदी कविता ,”आशिषों का आंचल भरकर प्यारे बच्चों द्वार तुम्हारे आई हूं” के माध्यम से हिंदी दिवस के सुअवसर पर हिंदी भाषा की महत्ता बताते हुए कहा कि आज भारत के 53 करोड़ से अधिक लोग हिंदी भाषा बोलते हैं गर्व का विषय है कि भारत ही नहीं वरन् विदेशों में भी हिंदी भाषा बोली जाती है।हिंदी भाषा विश्व की एकमात्र ऐसी भाषा है जिसे जैसी बोली जाती है हुबहू वैसी लिखी भी जाती है यह वास्तव में पूर्ण वैज्ञानिक भाषा हैं। कहते हुए हिंदी दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

सभी भाषाओं में हिंदी भाषा श्रेष्ठ: सुजाता
हिंदी साहित्य की सहायक प्राध्यापिका श्रीमती सुजाता दाश ने हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए चंद पंक्तियां कहकर वक्तव्य की शुरूआत की कहा कि हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, हिंदी से हिंदुस्तान है ।
अलख जगा दे हर दिल से,
हिंदी पर करते हम मान हैं |
तथा कविता”मैं भारत की बेटी आपकी अपनी हिंदी हूं” से हिंदी भाषा का अलख जगाई।उन्होंने कहा कि हमें प्रत्येक भाषा की जानकारी होना चाहिए ।इन भाषाओं में हिंदी भाषा श्रेष्ठ है। इसका केवल एक ही दिवस नहीं अपितु सदैव हिंदी भाषा का सम्मान करें।

हमारे अंदर अच्छे संस्कार हिंदी से आती: शांति
गार्जियन एण्ड गाईड स्कूल धनुहारडेरा के प्रभारी हिंदी भाषा के शिक्षिका श्रीमती शान्ति महंत ने हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी हम सबकी पहचान है। हर जाति की अपनी अपनी भाषा होती है उनमें मातृ भाषा हमारी हिंदी है।पहले दादी और पोते में अभिवादन हिंदी में किया करते थे लेकिन आज के परिवेश में हाय और बाय में किया करते हैं।हमारे अंदर अच्छे संस्कार हिंदी से आती है। हम हिंदी को विशेष महत्व दें तथा इस बात को हमेशा ध्यान में रखकर उसकी उन्नति जागृति के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।

आने वाले समय में अपने देश में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व की भाषा होगी हिंदी: मनोज
हिंदी दिवस समारोह के सुअवसर पर कार्यक्रम के विशिष्टअतिथि ख्यातिलब्ध चित्रकार ,साहित्यकार एवं समाज सेवी , राष्ट्रीय कवि संगम के अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव ने हिंदी भाषा के उद्भव और विकास के ऐतिहासिक स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि वह हमारा देश सन 1947 में आजाद हुआ पर आजादी से पांच हजार साल तक हम गुलाम रहे । पिछले 1949 से 74 साल हिंदी भाषा हमारी समृद्ध हुई है । देश के विभिन्न राज्यों में बोली जाने वाली भाषा के साथ संबंधों पर भी चर्चा करते हुए उनमें हिंदी की सर्वव्यापक और सहजता को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि लिपि के रूप में हिंदी को देवनागरी लिपि कहा जाता है। हिंदी भाषा के प्रति हमारा कर्त्तव्य है ।हमारे मन में किसी प्रकार की कोई भ्रांति नहीं होनी चाहिए कि अंग्रेजी भाषा ही जरूरी है और यह कैरियर बनाती है। हमारा मन हिंदी भाषा के प्रति अगाध श्रद्धा रूपी अच्छी भावना रखे। जितना भी हो सके शासन इसे अपनाने में लगी हुई है आने वाले समय में अपने देश में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व की भाषा हिंदी होगी।अंत में उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की शान है हिंदी,हम सबका अभिमान है हिंदी। हमारी एकता की, अभिव्यक्ति की , अधरों की मुस्कान है हिंदी।

हिंदी बोलने में बहुत सुकून मिलता है निसंदेह हिंदी भाषा सबसे सुंदर भाषा: तृप्ति
हिंदी दिवस पर जानकी कॉलेज ऑफ एजुकेशन धनुहारडेरा रायगढ़ के डायरेक्टर श्रीमती तृप्ति अग्रवाल ने हिंदी के प्रेरणादायक पंक्ति “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटन न हिय के सूल”। द्वारा अपने व्यक्तव्य प्रारंभ करते हुए कहा कि
मातृभाषा की उन्नति बिना किसी भी समाज की तरक्की संभव नहीं है तथा अपनी भाषा के ज्ञान के बिना मन की पीड़ा को दूर करना भी मुश्किल है। ये बात सौ फीसदी सत्य है,ये भाषा आज नहीं बोली गई ये भाषा सौ साल पहले बोली गई है। जिसमें सार्थकता है और प्रासंगिकता भी। हिंदी बोलने में बहुत सुकून मिलता है निसंदेह हिंदी भाषा सबसे सुंदर भाषा है हमको भाषा की तुलना नहीं करनी चाहिए क्योंकि किसी भी साहित्य हमेशा अपने साथ अलग संभावनाएं सदियों तक रखता है।किसी भाषा की आवश्यकता है तो उसे सीखने में कोई बुराई नहीं है।लेकिन ये बुराई हममें है कि उस भाषा को सीखकर उसे अपना स्टैंडर्ड बना लेते हैं ये बुराई उस भाषा की नहीं है ,भाषा के बुराई करने के बजाय हम अपने भीतर झांके भीतर से किसी भाषा को बाहर निकालें जिसमें हिंदी भाषा सर्वोपरि हो तो ज्यादा बेहतर है।

हिंदी के उत्थान का आओ करें प्रयास,मिलकर करते आज हम भाषा का उत्थान
हिंदी दिवस समारोह के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं समाज सेवी ,काव्य वाटिका के अध्यक्ष श्रीमती आशा मेहर “किरण” जी ने अपने वक्तव्य की शुरूआत इन पंक्तियों से की “हिंदी के उत्थान का आओ करें प्रयास,मिलकर करते आज हम भाषा का उत्थान” कहते हुए हिंदी भाषा की आवश्यकता एवं महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला एवं छात्रों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक की प्रशंसा करते हुए कहा कि नुक्कड़ नाटक के माध्यम से हिंदी का संदेश उत्कृष्ट प्रस्तुति हैं । हिंदी भाषी यदि विदेशों में मिल जाए तो उन्हें देखकर और भाषा को सुनकर जो आनंद मिलती है ।हिंदी से जो लगाव है वह एक हिंदुस्तानी ही समझ पाएगा। हमें बहुत खुशी होती है कि जब हम विदेशी महिलाओं व बच्चों को देखते है कि वो रामायण का पाठ करते हैं और ओम जय जगदीश हरे करते हैं विदेशों में भी हिंदी भाषा की महत्ता है।उन्होंने नेपाल में हिंदी भाषा के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने आगे कहा कि एक महिला विदेश गई हिंदी साहित्य उत्सव की प्रस्तुति हेतु कविता पाठ जब वो कर रही थी तो उसे सुनकर एक विदेशी महिला आकर बोली कि जिनके वाणी में इतनी मधुरता हैं माथे में लगी सुंदर बिंदी है तो हिंदी कितनी सुंदर होगी। उन्होंने धनाक्षरी, छंद ,दोहा रोला चौपाई आदि के विषय में भी विस्तार से चर्चा की और स्व रचित कविता द्वारा हिंदी के स्वरुप का उल्लेख किया। उन्होंने अंत कहा कि हिंदी को देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी महत्व दी जाती है।

स्मृति चिन्ह भेंटकर कर किया अतिथियों का सम्मान
हिंदी दिवस समारोह के मुख्य अतिथि श्रीमती आशा मेहर “किरण”जी एवं विशिष्ट अतिथि श्री मनोज श्रीवास्तव जी का सम्मान स्मृति चिन्ह भेंटकर जानकी कॉलेज ऑफ एजुकेशन धनुहारडेरा के डायरेक्टर श्रीमती तृप्ति अग्रवाल जी तथा प्राचार्य डॉ गजेंद्र चक्रधारी द्वारा किया गया।

जब भी हम मुंह खोले हिंदी बोलें
हिंदी दिवस समारोह में आभार व्यक्त करते हुए जानकी कॉलेज ऑफ एजुकेशन धनुहारडेरा के प्राचार्य डॉ गजेन्द्र चक्रधारी ने कहा कि आज दिवस हम सब ये दृढ़ संकल्प लें कि जब भी हम मुंह खोले हिंदी भाषा बोलें ।

मंच संचालन एवं उपस्थिति
कार्यक्रम का कुशलता पूर्वक मंच संचालन बी एड द्वितीय वर्ष के छात्र पायल अग्रवाल एवं दीपलाल साव ने किया।इस अवसर पर जानकी कॉलेज ऑफ एजुकेशन धनुहारडेरा रायगढ़ व गार्जियन एण्ड गाईड इंग्लिश मीडियम स्कूल धनुहारडेरा के समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टॉफ सहित छात्र छात्राओं की उपस्थिति एवं सहभागिता रही।उक्ताशय की जानकारी जानकी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ गजेंद्र चक्रधारी ने प्रैस विज्ञप्ति द्वारा दी ।







