
नियुक्ति अधिकार न होने के बाद एवं बिना विज्ञापन प्रकाशित किए इनकी नियुक्ति आदेश पत्र बि. ई.ओ. द्वारा कर दिया गया जारी।
आदेश में उल्लेखित सदर्भ पत्रों का आवक रजिस्टर में कोई संधारण नहीं।
सूचना के अधिकार अधिनियम से प्राप्त जानकारी से फर्जीवाड़ा होने के संकेत
वर्तमान बि.ई. ओ. का साथ संदेहास्पद,कई शिकायतों के बाद कार्यवाही शून्य
सारंगढ़ :- प्राप्त जानकारी अनुसार सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओँ में से प्रमुख शासकीय शालाओं में चल रहे मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में घोर लापरवाही का मामला उजागर हुआ है आवेदक के द्वारा जब सूचना के अधिकार अधिनियम से जानकारी हेतु आवेदन दिया गया तो छायाप्रति हेतु 5000 से 10000 रुपये की मांग कर बाद में समायोजित करने की बात कही गई और रुपये जमा करने के पूर्व सम्बंधित आपरेटर द्वारा धमकी और गाली- गलौच कर आवेदक को डराया गया जिससे आवेदक डर और दबाव में आकर मांगी गई राशि जमा किये बगैर घर वापस आ गया। दोबारा आवेदक ने पुनः आवेदन प्रस्तुत कर जानकारी प्रदान करने की प्राथर्ना की और जानकारी उपलब्ध कराने के एवज में कार्यालय द्वारा मांगी गई राशि जमा कर वापस घर गया जिसके बाद जानकारी न लेने हेतु फ़ोन में धमकी दी गई तत्पश्चात कार्यरत आपरेटर एवं उसके पिता आवेदक के गांव पहुँच कर उनके द्वारा आवेदक को देख लेने एवं सारंगढ़ का लोकल गुंडा हुँ कहकर धमकाया और अपशब्द कहा गया जिसकी सूचना आवेदक ने थाना में दे दी है। वर्तमान बी.ई.ओ. द्वारा मांगी गई जानकारी सम्बंधित आपरेटर को ही सविंदा होना जानने के बाद भी उपलब्ध कराने हेतु कह दिया गया । ततपश्चात कार्यलय द्वारा कूट रचना कर आवेदन में माँगी गई जानकारी न लेने के कारण प्रकरण नस्तीबद्ध करने का पत्र डाक से भेजा गया जिससे क्षुब्द होकर आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी से जानकारी प्राप्त की।

एक ही घर के सगे भाइयों का अलग अलग वर्ष में कर दी गयी नियुक्ति
सूचना के अधिकार के अधिनियम से प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि मार्च 2012 में श्री पंकज साहू आ. श्री देवनारायण साहू एवं सितम्बर 2014 में क्रमशः श्री लिंगराज साहू आ.श्री देवनारायण साहू पता- म.पो. सारंगढ़ की नियुक्ति बिना विज्ञापन निकाले आरक्षण रोस्टर के नियमों के विरुद्ध और बिना उच्च कार्यालय के अधिकार पत्र प्राप्त किये बगैर बिना अधिकार के विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा संविदा पर क्रमशः कर दी गई है। तथा वर्तमान में इनके चाचा / बड़े पिता की पुत्र की नियुक्ति भी सविंदा कंप्यूटर आपरेटर के पद पर जिलाधिकारी कार्यालय में की गई है। एक परिवार के दो सगे एवं एक चचेरे भाई की नियुक्ति एक विभाग में सविंदा पद पर करना वर्तमान तक एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
आदेश में उल्लेखीत सन्दर्भ पत्रो का आवक रजिस्टर में कोई संधारण नही–
प्राप्त जानकारी के अनुसार पंकज साहू की नियुक्ति आदेश ता प्रदान की गई है । किंतु इसमे सन्दर्भित पत्र कार्यलय जिला शिक्षा अधिकारी रायगढ़ के पत्र क्रमांक 8339/म.भा./2011-12 दिनांक मार्च 2012 दिया हुआ है। जिसमे तिथि का किसी भी प्रकार का उल्लेख नहीं है। और न ही ऐसे कोई पत्र कार्यालय के आवक पंजी में माह मार्च 2012 में संधारित किया गया है। एवं न लिगराज साहू के सविंदा पद पर नियुक्ति जानकारी उच्च कार्यालय को प्रेषित किया गया है में सन्दर्भित पत्र क्रमांक आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय का पत्र क्रमांक /म.भो./ कम्प्यूटर ऑपरेटर /2012 /709/ रायपुर दिनांक 28-6-2012 एवं जिला शिक्षा अधिकारी का पत्र क्रमांक /1245/म.भो./ कम्प्यूटर आपरेटर/2012 रायगढ़ दिनांक 28-6-2012 का उल्लेख किया गया है। जिसका आवक पंजी में कोई सन्धारण प्रथम दृष्टया उपलब्ध नही है । अगर सन्दर्भित पत्र के अनुसार नियुक्ति की गई है तो पूर्व दो वर्षों तक ना करके दो वर्ष बाद 2014 में पूर्व से कार्यरत ऑपरेटर के सगे भाई का ही क्यों..?
जावक पंजी में कूट रचना कर ओवर राइटिंग किसके द्वारा किसके निर्देश पर किया गया एक ही क्रमांक 741 में दो पत्र क्यों प्रेषित है..?
इन आपरेटरों का अब तक संदिग्ध आदेश के आधार पर लाखों रुपए का वेतन भुगतान और शासन की महती योजना का बजट निर्माण चावल वितरण अन्य आबंटन का लेखा जोखा कई महत्वपूर्ण कार्य सौंपकर सरकार को करोड़ो रुपये का वारा न्यारा प्रतीत होता है। जो कि जांच का विषय है । ऐसा कई महत्वपूर्ण प्रश्न विभाग के गले का फ़ांस बन गई है जिसका जवाब अब तक प्राप्त नही है ।
क्या सभी आवेदकों को प्रलोभन या धमकी देकर जानकारी उपलब्ध न कराने का प्रयास है..? आदि कई प्रश्न है जो अब तक डेढ़ी खीर बने हुये है।
कई शिकायतो के बाद भी कार्यवाही शून्य–
एक शिकायकर्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि उनकी नियुक्ति पूर्ण रूप से फर्जी है जिसके सम्बंध में मैने उच्च अधिकारियों से मौखिक लिखित में शिकायत कि है ओर मूझे ही कार्यवाही कर सारंगढ़ कलेक्टर में शिक्षा विभाग के पंकज के मित्र कलेक्टर के करीबी पद पर प्रतिनियुक्ति के नाम से धमकियां पुनः दी गयी। पर कोई कार्यवाही जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा नही की गई है। ऐसे में देखना यह है की क्या..?? उचित जांच कर इनपर कार्यवाही विभाग करती है।या पूर्व की भांति अब भी इन अधिकारियों से साठ – गांठ पुनः रंग लाती है। वर्तमान में नवपदस्थ कलेक्टर महोदय जी की जिस तरह की कार्यशैली दिख रही है।
इससे स्प्ष्ट है कि इन आपरेटरों को शिकायत प्राप्त होने पर सेवा से तत्काल पृथक कर एवं उच्च स्तरीय टीम बनाकर निष्पक्ष जांच की जाएगी।






