
महासमुन्द:-शिक्षा के मानवीय करण के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध कोकड़ी सरकारी स्कूल के शिक्षक श्री गेंदलाल कोकडिया जो कभी किसी हड़ताल, रैली में शामिल नहीं होते, कभी स्कूल बंद नहीं करते,से संवाद करने पर उन्होंने बताया कि,, युक्तियुक्तकरण स्कूल शिक्षा विभाग का सर्वोत्तम & साहसिक निर्णय है, कलेक्टर महासमुंद स्वयं उपस्थित रहकर सारे प्रक्रियाओं का गवाही बनें,ऐसे ही राज्य भर के कलेक्टरों के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ युक्तियुक्तकरण १००%सफलता के साथ पूरा किया गया है, इससे दूरस्थ गांवों के बच्चों के साथ न्याय हुआ है,छग राज्य बनने के बाद पहली बार पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और साहस के साथ यह निर्णय सफल हुआ,शिक्षक संगठनों ने व पूर्व सरकारों ने आज तक गंभीरता से ध्यान नहीं दिया था, जिसका फल परिणाम कोकड़ी सरकारी स्कूल जैसे अनेक स्कूल २०वर्षों से अधिक समय तक एक शिक्षकीय रहे, शहरों के स्कूलों में दर्ज संख्या से अधिक काबिज शिक्षकों को गांवों में पढ़ाने के लिए,शिक्षक संगठनों और पूर्व के अधिकारियों और नेताओं ने गंभीर प्रयास नहीं किए, हमें पक्ष-विपक्ष से उठकर कोई भी सरकार के अच्छे निर्णयों का समर्थन करना चाहिए, ताकि सरकार बच्चों के हित में और अच्छा निर्णय ले पाये,जिले के अनेक स्कूलों को बंद किए जाने के संबंध में लिए निर्णय को भी श्री कोकडिया ने साहसिक और अच्छा निर्णय बताया, क्योंकि जिन स्कूलों में बच्चे ही नहीं ,उन स्कूलों को मर्ज करना जनता के पैसों का सदुपयोग है,शिक्षक संगठनों और विरोध करने वाले नेताओं के अधिकांश बच्चे इन सरकारी स्कूलों में पढ़ते ही नहीं, इसीलिए आज तक इसमें सुधार का कोई निर्णय नहीं ले पाये, पहली बार सरकार ने गरीबों के बच्चों को पढ़ाने के लिए उचित शिक्षक व्यवस्था किया है,जो वो नहीं कर पाये थे,उनको उनका समर्थन करना चाहिए, शिक्षकों को हड़ताल करने का अधिकार सरकार को देना ही नहीं चाहिए, बच्चों की पढाई बंद कर हड़ताल करने वाले शिक्षक नहीं हो सकते,मांगे मनवाने के दूसरे तरीके हो सकते हैं, स्कूल बंद करना अनुचित & अन्याय पूर्ण कदम, पिछले बार शाला प्रबंधन विकास समीतियों ने स्कूलों में ताला लगाकर हड़ताली शिक्षकों को स्कूलों से बाहर निकाला था, ठीक ऐसे ही करने की जरूरत है,साल का पहला माह नहीं बिता २दिन हड़ताल में समाप्त हो गया है,






