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बरमकेला अंचल के कई आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति जर्जर, कई केंद्र किराए के मकानों में संचालित

बरमकेला। बच्चों के प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और समग्र विकास के लिए बनाए गए आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति बरमकेला क्षेत्र में बेहद चिंताजनक बनी हुई है। जानकारी के अनुसार नगर क्षेत्र में संचालित पाँच आंगनबाड़ी केंद्रों में से चार केंद्र जर्जर अवस्था में हैं। भवनों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगहों पर आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन मजबूरी में किराए के मकानों में किया जा रहा है। इससे न केवल बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं बल्कि उनके बेहतर शैक्षणिक और मानसिक विकास पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आंगनबाड़ी केंद्र देश की समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य छोटे बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। यहां 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को खेल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जाता है, साथ ही गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को भी पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
लेकिन बरमकेला में इन केंद्रों की वास्तविक स्थिति इस उद्देश्य के विपरीत दिखाई दे रही है। कई आंगनबाड़ी भवन वर्षों पुराने और जर्जर हो चुके हैं। दीवारों में दरारें, छत से पानी टपकने की समस्या, पर्याप्त जगह की कमी और मूलभूत सुविधाओं का अभाव आम बात बन गई है। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भी कार्य संचालन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति को देखते हुए कई स्थानों पर केंद्रों को किराए के मकानों में संचालित करना पड़ रहा है। किराए के भवनों में भी पर्याप्त जगह और सुविधाएं नहीं मिल पातीं, जिससे बच्चों के बैठने, खेलने और पढ़ने की व्यवस्था प्रभावित होती है। कई बार छोटे कमरों में ही बच्चों को बैठाकर गतिविधियां करानी पड़ती हैं।
भारत सरकार द्वारा लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में आंगनबाड़ी या बालवाड़ी को 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा और विकास का आधार स्तंभ माना गया है। नई शिक्षा नीति में 5+3+3+4 शिक्षा संरचना के तहत पहले चरण में बच्चों की बुनियादी साक्षरता, संज्ञानात्मक विकास, शारीरिक विकास तथा सामाजिक और भावनात्मक विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए खेल-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षा पद्धति को बढ़ावा दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्ष उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस समय उन्हें उचित वातावरण, पोषण और शिक्षा नहीं मिल पाती तो इसका असर आगे की पढ़ाई और विकास पर भी पड़ सकता है।
बरमकेला में आंगनबाड़ी केंद्रों की जर्जर स्थिति को देखते हुए स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि छोटे-छोटे बच्चों को ऐसे असुरक्षित भवनों में भेजना जोखिम भरा हो सकता है। कई अभिभावक यह भी मांग कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द नए और सुरक्षित आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कराए, ताकि बच्चों को बेहतर वातावरण में शिक्षा और पोषण मिल सके।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि बच्चों की शिक्षा की शुरुआत ही कमजोर व्यवस्था से होगी तो इसका असर उनके भविष्य पर भी पड़ेगा।
“नींव अगर कमजोर होगी तो उस पर बनने वाला भवन भी कमजोर ही होगा।”
इसी तरह यदि आंगनबाड़ी जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों की स्थिति मजबूत नहीं होगी तो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना करना भी मुश्किल होगा।
ऐसे में आवश्यकता है कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर ध्यान देते हुए जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की मरम्मत या नए भवनों के निर्माण की दिशा में शीघ्र कदम उठाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर वातावरण में प्रारंभिक शिक्षा एवं पोषण मिल सके।

विभाग ने भेजी रिपोर्ट, जल्द कार्य होने की उम्मीद; खुर्शीद बानो

इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी खुर्शीद बानो खान ने बताया कि जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की जानकारी उच्च कार्यालय को भेज दी गई है। विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है और जल्द ही सुधार या निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

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Sudhir Chouhan

पत्रकार सुधीर चौहान (संपादक) स्वतंत्र भारत न्यूज़ मो.नं.9098259961

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