
भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया,निष्काम भक्ति नारायण को प्रिय हैं-देवी राधे प्रिया जी
बरमकेला:- ग्राम बेंगची में श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन संगीतमय रसपान देवी जी के मुखारविंद से सुनने वालों की उपाय भीड़ लगी रही इस दौरान पूज्या राधेप्रिया जी ने आज के कथा को हे राधा माधव हे कुंज बिहारी के मंधुर संगीत से शुरुआत मीठी-मीठी गीतों से करते हुए बाल लीला, गोवर्धन पूजन छप्पन भोग के बारे में विस्तार से सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए कहा की श्रीकृष्ण
भगवान नारायण के पूर्ण अवतार हैं बालकृष्ण भगवान राम और कृष्ण नारायण के पूर्ण अवतार हैं मधुर लीला का रसपान करने के लिए उपस्थित हुए हैं देवी जी ने बेंगची के सभी कमेटी सदस्यों को विवेक पटेल जी, सरपंच दूलार साहू जी, अरविन्द पटेल जी सभी को नमन किया। आगे देवी जी ने कहा
मधुर बाल लीला का कुंजो के साथ बिहार करते थे इसलिए उनका नाम कुंजबिहारी पड़ा लीला करने के लिए आप धरातल पर आए आप हम सब को उपदेश का वर्णन करना चाहिए हमें कृष्ण जी राम जी के तरफ जीवन जीना चाहिए कृष्ण जी के उपदेश का पालन करना चाहिए आज पंचम दिवस में प्रभु के बाल लीला का रसपान करना है प्रेम के बारे में विस्तार से समझाया भगवान का भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया श्री राधे प्रिया जी ने आगे रसपान कराते हुए यह कहा कि सज्जनों 7 वर्ष के कृष्णा सात कोस लंबे चौड़े गिरिराज को 7 दिन 7 रात पर्यंत इतनी उंगली के नाक पर धारण किया ऐसा मेरे गोवर्धन नाथ का सुंदर स्वरूप है लेकिन ब्रज वासियों के मन की भावना देखो जब कन्हैया ने इतनी उंगली के नख पर गिरिवर धारण कर लिया तो आ जाओ ब्रज वासियों सब गिरिराज के नीचे आ गए परमात्मा भी भक्ति के बदले यदि हम भूख कामना करते हैं मोक्ष की इच्छा रखते हैं तो हमारी भक्ति के श्रेष्ठ नहीं हो सकती इसलिए परमात्मा के चरणों में जो भक्ति की जाए और निष्काम करो और निष्काम प्रीति जिसके मन में आ जाए उस प्रीति से गोविंद गोविंद रिची जाता हैभागवत में तो श्री सुखदेव स्वामी कहते हैं परमात्मा के समीप चले जाने का नाम उपासना है 80000 कर्मकांड के जो वेद मंत्र हैं वह सभी मंत्र ब्रज मंडल में गोपी बनकर आ गए इन गोपियों के अलग-अलग विभाग हैं।
इस तरह बाल लीला गोवर्धन पूजन छप्पन भोग सब का रसपान करने के पश्चात छप्पन भोग प्रसाद का वितरण किया गया कई हजार की संख्या में श्रद्धालु कथा का संगीतमय रसपान करने आते हैं।






