
सक्ती;- जिले के हसौद तहसील क्षेत्र में बीते चार-पाँच वर्षों से सेंद्री पंचायत में अवैध रूप से बिना किसी विभागीय अनुमति के लाल ईट का निर्माण कर लाखों-करोड़ों का व्यापार किया जा रहा है। जिससे राजस्व विभाग को हर वर्ष करोड़ों का भारी नुकसान होता आ रहा हैं। तो वही ताजूब की बात यह भी है कि जिन लोगों के द्वारा बिना किसी वैध दस्तावेज के लाखों-करोड़ों का काला कारोबार खुलेआम किया जा रहा है। तो वही जिन लोगों के द्वारा अवैध तरीके से ईट का निर्माण किया जा रहा है उनके गिरेबान तक स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदारों का हाथ ना पहुँच पाना एक बड़ा सवाल बना हुआ है। ऐसा नहीं की इस मामले की जानकारी स्थानीय राजस्व विभाग के अधिकारियों ना हो। इस के बौजूद अवैध तरीके से लाल ईट का निर्माण कर रात दिन सरेआम बिना रॉयल्टी के परिवहन कर प्रति माह लाखों का राजस्व विभाग को चूना लगने वालों के ऊपर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई ना होना विभागीय अधिकारियों के साठगांठ की भूमिका को स्पष्ट आरोपों से दर्शाता है।
बता दें सेंद्री में बिना किसी अनुमति एवं बिना किसी वैध दस्तावेज़ के दर्जनों ऐसे लाल ईट का भट्ठा है जहाँ एक भट्ठे में ढाई से तीन लाख तक लाल ईट को पका कर बेचा जा रहा है। तो वहीं सेंद्री में ऐसे 40 से 50 भट्ठे है तो स्पष्ट अंदाजा लगाया जा सकता है की किस तरह लाल ईट का कला साम्राज्य सेंद्री में संचालित हो रहा है। हसौद क्षेत्रवासियों की माने तो यह कहना लाजिमी नहीं होगा की सक्ती जिले में चले वाले ईट भट्ठों का सबसे बड़ा अवैध लाल ईट का कारोबार सेंद्री में संचालित किया जाता है। बता दे खनिज विभाग की इस निष्क्रिय रवैये से रसूखदारों के इस काले व्यापार में प्रति वर्ष दुगने दर से वृद्धि होते जा रहा हैं।
अवैध भट्ठों पर लगाम ना लगने से पीएम आवास के हितग्राहियों का टूट रहा कमर.?
केंद्र सरकार व राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना नाम का हवाल लेकर लाल ईट के अवैध कारोबारी अपने व्यक्तिगत फायदे व लाखों कमाने के लिए बड़े पैमाने पर व्यापार कर ईट को दुगने दामों पर बेच कर राजस्व विभाग को खुला चूना लगा रहे हैं। जिससे असल पीएम आवास के हितग्राहियों को आवास बनाने और इंठों का दाम देख कर पैरो तले जमीन खिसकने लगा है। पीएम हितग्राहियों का पक्के घर का सपना भी अब ईट का मंहगाई देख कर अधूरा होने लगा है। सरकार के उम्मीदों और सपनों पर लाल ईट के अवैध कारोबारी बड़े चुनौतियों के रूप में निकल कर सामने खड़े हो रहें है। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को मिलने वाली पहली किस्त 40 हजार रुपये से अब घर निर्माण के लिए ईंट या अन्य सामग्री खरीदना मुश्किल हो गया है। जिसका सीधा असर पीएम आवास योजना पर पड़ने लगा है।






