
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा, भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का लिया संकल्प
विशेष समाचार | स्वतंत्र भारत न्यूज़ 24
दशहरा, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का एक प्रमुख पर्व है। यह पर्व असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। देशभर में दशहरा पर्व श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर रावण दहन, धार्मिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर अधर्म का अंत किया था। वहीं, मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध किए जाने की मान्यता भी इस पर्व को विशेष महत्व प्रदान करती है। दशहरा हमें सिखाता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।

बुराइयों को त्यागने का पर्व
दशहरा केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और अन्य बुराइयों को समाप्त करने का भी संदेश देता है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और आदर्शों का प्रतीक है। उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत किया जा सकता है।
इस पावन अवसर पर लोगों को संकल्प लेना चाहिए कि वे सत्य के मार्ग पर चलेंगे, अन्याय का विरोध करेंगे और समाज में शांति एवं सद्भाव बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
समाज को एकता और सद्भाव का संदेश
दशहरा पर्व हमें यह भी प्रेरणा देता है कि समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर कर एक बेहतर भविष्य का निर्माण किया जाए। यह पर्व नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और अच्छे कार्यों की शुरुआत करने का अवसर है।
स्वतंत्र भारत न्यूज़ 24 की ओर से समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को विजयादशमी एवं दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्रीराम की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे।
पत्रकार सुधीर चौहान
संपादक — स्वतंत्र भारत न्यूज़ 24






