
बरमकेला।जीवन की दृष्टि से पर्यावरण मानव के लिए सर्वोच्च जरुरत है। जल, जंगल और जमीन तीनों उसके प्रमुख आधार हैं। विकास के मौजूदा मॉडल की विफलता यह कि जीवन के इन तीनों आधारों को प्रदूषण ने लील लिया है।

यही वजह है आज देश की आबादी का बड़ा हिस्सा स्वच्छ व सुरक्षित पानी, शौचालय और शुद्ध हवा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से भी वंचित है। पर्यावरण पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। इस दिशा में समाज और सरकार को स्वच्छता और वृक्षारोपण को एक जनान्दोलन बनाने की तरफ सोचना होगा, जिसके लिए समाज की सहभागिता होना पहली और आवश्यक है।यह कहना है समाजसेवी,पर्यावरण प्रेमी एवं चेम्बर ऑफ़ कामर्स इकाई बरमकेला के अध्यक्ष रतन शर्मा का।उनका मानना है कि पर्यावरण की सेहत के लिए दो कामों का निरन्तर जारी रहना बेहद जरुरी है, पहला स्वच्छता और दूसरा वृक्षारोपण।पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अहम पहल है, क्योंकि जीवनदायनी ऑक्सीजन का एकमात्र स्त्रोत वृक्ष ही हैं। मानव जीवन वृक्षों पर ही निर्भर है। यदि वृक्ष नहीं रहेंगे तो धरती पर जीवन संकट में पड़ जाएगा।

असल संकट यही है कि विकास के आधुनिक मॉडल ने सब कुछ उजाड़ दिया है। जंगल ही थे जो जलवायु परिवर्तन के कुप्रभावों को कम करने की क्षमता रखते हैं, जिसके लिए वृक्षारोपण अभियान जारी रहना जरुरी है।

समाज और सरकार को मिलकर वृक्षारोपण संस्कृति का विकास करना होगा, जिसके फायदे कई स्तरों पर समाज को मिलेंगे। इस दिशा में जागरुकता के लिए समाज के साथ समूह चर्चाएं की जाएं। विभिन्न स्तरों पर सामाजिक सहभागिता बढ़ायी जाए। जाए।पर्यावरण संरक्षण और संवर्द्धन कोई साधारण मसला नहीं है। आज ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी पर जीवन के लिए वार्निंग बना हुआ है। पर्यावरण का संकट मानव अस्तित्व को चुनौती दे रहा है। भारत जैसे विकासशील देशों में तो जनसंख्या का दबाव और भी निरन्तर बढ़ रहा है।इसलिए बृक्षारोपण अभियान चलाकर जनांदोलन का रूप दिया जाना चाहिए। चेम्बर अध्यक्ष श्री रतन शर्मा ने लोगों से अपील की है कि सावन का महीना बृक्षारोपण के लिए बहुत ही उपयुक्त मौसम है ऐसे में बरगद,पीपल,आंवला, बेल,सामी का रोपण करके पुण्य के साथ पर्यावरण की भी रक्षा कर सकते हैं।इसलिए कम से कम एक पेड़ जरूर लगाएँ।






