धान खरीदी से पहले राजस्व व्यवस्था पर संकट के बादल, पदोन्नति और वेतनमान में सुधार सहित कई मांगों को लेकर लामबंद हुए पटवारी; किसानों और आम जनता की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
सरिया/सुधीर चौहान। वेतन विसंगति, लंबित पदोन्नति और पीवी ऐप की तकनीकी जटिलताओं को लेकर पटवारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। अपनी लंबित मांगों को लेकर पटवारी तहसील कार्यालय के बगल में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। आंदोलन के चलते राजस्व कार्यों पर असर पड़ने की आशंका गहराने लगी है। वहीं, धान खरीदी का समय नजदीक आने के साथ ही प्रशासन के सामने किसानों के रकबा सत्यापन और अन्य जरूरी राजस्व कार्यों को समय पर पूरा कराने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
पटवारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं हो पाया है। पीवी ऐप के माध्यम से फसलों और धान के रकबे का सत्यापन कराने की व्यवस्था ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

पीवी ऐप की तकनीकी दिक्कतों से बढ़ी परेशानी
पटवारियों के विरोध का प्रमुख कारण पीवी ऐप के जरिए फसलों और रकबे का सत्यापन करना भी है। आंदोलनरत कर्मचारियों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर मोबाइल नेटवर्क, सर्वर की समस्या और ऐप के संचालन में आने वाली तकनीकी बाधाओं के कारण मौके पर जाकर जानकारी दर्ज करना कठिन हो रहा है।
उनका कहना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले मैदानी परिस्थितियों का आकलन किया जाना चाहिए। तकनीक का उद्देश्य काम को आसान बनाना होना चाहिए, लेकिन यदि इसके संचालन में लगातार दिक्कतें आएं तो निर्धारित समय में काम पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। पटवारियों ने पीवी ऐप के माध्यम से रकबा सत्यापन करने पर अपनी आपत्ति जताते हुए इस व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार की मांग की है।

वेतन विसंगति और पदोन्नति का मुद्दा भी बना आंदोलन की वजह
पटवारियों की नाराजगी केवल पीवी ऐप तक सीमित नहीं है। वेतन विसंगति दूर करने और लंबे समय से लंबित पदोन्नति के मामलों का निराकरण भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि मैदानी स्तर पर राजस्व संबंधी जिम्मेदारियों के साथ विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद वेतनमान और पदोन्नति से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं होने से उनमें असंतोष बढ़ रहा है।
पटवारियों के अनुसार, अपनी मांगों को लेकर संबंधित अधिकारियों और शासन के समक्ष कई बार अपनी बात रखी गई है। जिले के हर एक तहसील मुख्यालय में यह आंदोलन क्रमशः जारी है। इसके बावजूद ठोस निर्णय नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

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धान खरीदी से पहले किसानों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
धान खरीदी का सीजन नजदीक होने के कारण पटवारियों की हड़ताल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसानों के रकबे का सत्यापन, गिरदावरी संबंधी जानकारी और राजस्व अभिलेखों का मिलान जैसी प्रक्रियाएं धान खरीदी की तैयारियों में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में यदि इन कार्यों में देरी होती है, तो किसानों के पंजीयन और धान विक्रय से जुड़ी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।
इसके अलावा नामांतरण, सीमांकन, फौती प्रकरण और विभिन्न राजस्व अभिलेखों से संबंधित कामकाज में भी देरी की आशंका है। जाति, आय और निवास प्रमाण पत्रों से जुड़े मामलों में लोगों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। हालांकि, इन कार्यों पर वास्तविक असर की स्थिति संबंधित कार्यालयों में लंबित प्रकरणों और प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

समाधान के लिए शासन और पटवारियों के बीच संवाद जरूरी
पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने वेतनमान, पदोन्नति और डिजिटल कार्यप्रणाली से जुड़ी समस्याओं को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर कर्मचारी अपनी मांगों पर ठोस निर्णय चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर धान खरीदी और आम जनता से जुड़े राजस्व कार्यों को समय पर पूरा कराना भी जरूरी है।
ऐसे में शासन और पटवारी प्रतिनिधियों के बीच सार्थक बातचीत कर समाधान निकालना महत्वपूर्ण हो गया है। वेतन विसंगति और पदोन्नति के मामलों पर स्पष्ट निर्णय के साथ पीवी ऐप की तकनीकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकाला जाता है, तो इस गतिरोध को समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है।
अब सबकी नजर प्रशासन और शासन की अगली पहल पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो हड़ताल का असर किसानों और आम नागरिकों के जरूरी कामकाज पर और अधिक पड़ सकता है।
यह रहे मुख्य रूप से उपस्थित
संतोष पटेल जिला अध्यक्ष, परसराम पटेल बरमकेला तहसील अध्यक्ष, सुनील ओगर सरिया तहसील अध्यक्ष, रोशन बिस्वाल सचिव सारंगढ़, संजय पटेल कोषाध्यक्ष सारंगढ़, शिवकुमार देवांगन जिला सचिव सारंगढ़ और सैकड़ो की संख्या में पटवारी उपस्थित रहे।






