
रायगढ़:- संस्कारधानी और उद्योग नगरी के रूप में पहचानी जाने वाली रायगढ़ की सड़कों पर बेखौफ बदमाशों का तांडव इस कदर हावी हो चुका है कि अब उन्हें न तो कानून का खौफ है और न ही खाकी की हनक का अहसास। कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती देते हुए शहर के सबसे महफूज और अति-संवेदनशील इलाके में गुंडागर्दी का एक ऐसा नंगा नाच देखने को मिला, जिसने पुलिस महकमे के सुरक्षा दावों की कलई खोलकर रख दी है। जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय के ठीक सामने, मेन रोड स्थित एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के पास रूपाली गारमेंट्स के संचालक साहिल अंबानी पर आधा दर्जन से अधिक दबंगों ने बीच सड़क पर हमला बोल दिया। गाली-गलौज, लात-घूंसों और खुलेआम दी गई धमकियों से पूरा इलाका दहल उठा। रविवार की रात करीब नौ बजे घटी इस सनसनीखेज वारदात के बाद शहर में दहशत का माहौल पसर गया।
पुलिस कप्तान की चौखट पर घटित इस हिंसक वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलते ही कोतवाली पुलिस को आनन-फानन में शासन की ओर से खुद संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करनी पड़ी है।सत्ता और रसूख की हनक में चूर दबंगों का सड़क पर नंगा नाच..प्रत्यक्षदर्शियों और एफआईआर में दर्ज ब्यौरे के मुताबिक, रविवार की रात करीब 9:10 बजे शहर की मुख्य सड़क पर आवाजाही सामान्य थी। लोग अपने रोजमर्रा के काम निपटा रहे थे, तभी एसपी कार्यालय के सामने स्थित कॉम्प्लेक्स के पास अचानक चीख-पुकार और गालियों की गूंज सुनाई देने लगी। बेखौफ आरोपियों ने रूपाली गारमेंट्स के संचालक साहिल अंबानी को चारों तरफ से घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमलावर इतने उग्र थे कि उन्होंने बीच सड़क पर कानून को अपने हाथ में लेने से पहले एक पल भी नहीं सोचा। गंदी-गंदी गालियां बकते हुए साहिल पर हाथ-मुक्कों की ताबड़तोड़ बरसात कर दी गई। पीड़ित जब तक संभल पाता, तब तक भीड़ के सामने उसे बेरहमी से पीटा जाता रहा। आसपास के राहगीर और दुकानदार स्तब्ध रह गए। कोई बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं जुटा सका, क्योंकि हमलावर पूरी तरह से बेकाबू होकर हिंसक तांडव मचा रहे थे।
जिस स्थान पर परिंदा भी पर मारने से पहले सोचता है, वहां दबंगों का इस तरह खुलेआम किसी व्यापारी पर टूट पड़ना रायगढ़ की चरमराती कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही शहर में उबाल और फैली अफवाहें..घटना के तुरंत बाद किसी राहगीर द्वारा बनाया गया मारपीट का खौफनाक वीडियो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, फेसबुक और वॉट्सऐप ग्रुपों में जंगल की आग की तरह प्रसारित होने लगा। वीडियो में आरोपी खुलेआम गाली-गलौज करते और पीड़ित को बेरहमी से पीटते हुए साफ नजर आ रहे हैं। जैसे ही यह क्लिप सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर वायरल हुई, आम जनता और व्यापारिक जगत में भारी आक्रोश और भय का माहौल बन गया। शहर के विभिन्न हिस्सों में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं, जिससे शांति व्यवस्था पूरी तरह चरमराने की कगार पर पहुंच गई। सोशल मीडिया पर फैलती इस अशांति और लोगों के बीच बढ़ते आक्रोश को भांपते हुए पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। रविवार की रात घटित इस घटना की गूंज जब तक प्रशासनिक गलियारों में पहुंची, तब तक हालात तनावपूर्ण हो चुके थे। यदि समय रहते पुलिस सक्रिय नहीं होती, तो व्यापारियों और आम जनता के बीच भड़का यह असंतोष किसी बड़े जनआंदोलन या टकराव का रूप ले सकता था।

कोतवाली टीआई अमित तिवारी ने खुद संभाला मोर्चा, शासन की ओर से दर्ज कराया अपराध..मामले की गंभीरता और शहर की बिगड़ती फिजा को देखते हुए नगर कोतवाल अमित कुमार तिवारी ने खुद मोर्चा संभाला। किसी निजी शिकायत का इंतजार किए बिना, कोतवाली पुलिस ने मामले को अपनी ओर से संज्ञान में लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो फुटेज को साक्ष्य के तौर पर विधिवत संग्रहित किया गया। वीडियो के तकनीकी विश्लेषण और मौके पर मौजूद चश्मदीदों के बयानों के आधार पर हुड़दंगियों की एक-एक कर शिनाख्त की गई। जांच के उपरांत कोतवाली थाना प्रभारी अमित कुमार तिवारी ने शासन की ओर से शिकायतकर्ता बनते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत 21 सितंबर 2026 की देर रात 23:57 बजे बाकायदा अपराध क्रमांक 0533/2026 पंजीबद्ध किया। पुलिस ने नए आपराधिक कानून ‘भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023’ की धारा 194 (लोक शांति में विघ्न डालना, दंगा और उपद्रव फैलाना) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी कर शहर का माहौल बिगाड़ने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
बाबू, डालमिया बंधु और विपिन मिश्रा समेत सात नामजद आरोपियों पर शिकंजा..कोतवाली पुलिस द्वारा दर्ज की गई इस बहुचर्चित एफआईआर में शहर के कई चर्चित चेहरों और रसूखदारों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर जिन सात मुख्य आरोपियों को नामजद किया है, उनमें बाबू, अनिल डालमिया, विक्की डालमिया, गोल्डी अंबानी, अन्नु डालमिया, हैप्पी डालमिया और विपिन मिश्रा शामिल हैं। इसके अलावा वारदात में शामिल कई अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भी अपराध पंजीबद्ध किया गया है। एफआईआर के दस्तावेजों के अनुसार, इन आरोपियों की उम्र 30 से 40 वर्ष के बीच है और ये सभी रायगढ़ शहर के ही निवासी बताए जा रहे हैं। प्राथमिक जांच में यह बात भी निकलकर सामने आई है कि यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित था और आपसी रंजिश अथवा विवाद के चलते पीड़ित व्यापारी को सरेराह सबक सिखाने की नीयत से अंजाम दिया गया था। नामजद आरोपियों में डालमिया परिवार से जुड़े कई लोगों के नाम सामने आने के बाद शहर के सियासी और कारोबारी गलियारों में जबरदस्त सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

SP कार्यालय के मुहाने पर गुंडागर्दी: क्या अपराधियों के दिलों से मिट चुका है पुलिस का खौफ?इस पूरी घटना ने रायगढ़ पुलिस की रात्रि गश्त, डायल 112 की तत्परता और खुफिया तंत्र की सक्रियता पर कड़े सवालिया निशान दाग दिए हैं। वारदात स्थल कोतवाली थाने से महज एक किलोमीटर दक्षिण दिशा में है और ठीक पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने स्थित है। जिस दफ्तर में बैठकर जिले के आला पुलिस अधिकारी अपराध और अपराधियों के खात्मे की रणनीति बनाते हैं, उसी दफ्तर के मुहाने पर खड़े होकर बेखौफ गुंडे एक व्यापारी का कॉलर पकड़कर उसे पीटते हैं, मां-बहन की भद्दी गालियां बकते हैं और आराम से फरार हो जाते हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर एसपी दफ्तर के सामने ही नागरिक और व्यापारी सुरक्षित नहीं हैं, तो शहर की संकरी गलियों और बाहरी इलाकों में सुरक्षा की उम्मीद किससे की जाए? व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग इस घटना के बाद खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है और आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग को लेकर लामबंद हो रहा है।
शहर में तनाव बरकरार, पुलिस की टीमें दबिश में जुटीं, गिरफ्तारी पर टिकीं निगाहें..एफआईआर दर्ज होने के बाद नगर कोतवाल अमित कुमार तिवारी स्वयं इस संवेदनशील प्रकरण की विवेचना कर रहे हैं। पुलिस की अलग-अलग टीमें आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों और प्रमुख बाजारों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो या अफवाह फैलाने वालों पर भी साइबर सेल के जरिए पैनी नजर रखी जा रही है। अब पूरे शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एसपी कार्यालय के सामने कानून को ठेंगा दिखाने वाले इन रसूखदार आरोपियों को पुलिस कब तक सलाखों के पीछे भेजती है। यदि इस संगीन मामले में पुलिसिया कार्रवाई में जरा भी ढिलाई बरती गई, तो न केवल शहर के व्यापारियों का आक्रोश फूटेगा, बल्कि खाकी के इकबाल पर लगा यह बदनुमा दाग और गहरा हो जाएगा।






