
रायगढ़:- जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) धर्मजयगढ़ में प्राचार्य आदरणीय श्री ए. के. पैंकरा के कुशल नेतृत्व में दिनांक 09 मार्च से 13 मार्च 2026 तक आयोजित पाँच दिवसीय “चेतना विकास मूल्य शिक्षा परिचय शिविर” का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। कार्यक्रम प्रभारी श्री उत्तरा कुमार देवांगन एवं समन्वयक श्री संतोष पटेल के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में संस्थान के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्र-अध्यापक उत्साहपूर्वक भाग लेकर मूल्य आधारित शिक्षा के विभिन्न आयामों को समझ रहे हैं।
इस कार्यशाला का उद्देश्य भावी शिक्षकों को केवल पाठ्य ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों तथा सकारात्मक जीवन दृष्टि से जोड़ना है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। इसी सोच को साकार करने के लिए इस शिविर का आयोजन किया गया है।

शिक्षा के साथ संस्कारों का समन्वय
कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र-अध्यापकों को बताया जा रहा है कि एक शिक्षक केवल ज्ञान का प्रसारक नहीं होता, बल्कि वह समाज का मार्गदर्शक भी होता है। जब शिक्षक स्वयं नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सकारात्मक सोच को अपनाता है, तभी वह विद्यार्थियों में भी इन गुणों का संचार कर सकता है। शिविर के माध्यम से भावी शिक्षकों को यह समझाया जा रहा है कि शिक्षा और संस्कार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
अनुभवी अतिथि उद्बोधकों का मिला मार्गदर्शन
इस शिविर में अछोटी से प्रशिक्षित अतिथि उद्बोधक आदरणीय श्रीमती उर्मिला सिंदार एवं श्री शुक्लांबर पटेल द्वारा प्रतिभागियों को प्रेरणादायी विचारों से अवगत कराया जा रहा है। उनके उद्बोधन में जीवन के मूल्यों, अनुशासन, सहयोग, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यदि जीवन में मूल्यों की नींव मजबूत हो तो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी अपने मार्ग से विचलित नहीं होता। शिक्षक समाज में ज्ञान का दीप जलाने के साथ-साथ नैतिकता और मानवीयता का संदेश भी देता है।
गतिविधियों और समूह चर्चा के माध्यम से सीखने का अवसर
कार्यशाला के दौरान विभिन्न समूह चर्चा, संवाद सत्र, प्रेरक गतिविधियाँ और सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान दिया जा रहा है बल्कि उन्हें व्यवहारिक जीवन में मूल्यों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। छात्र-अध्यापक अपने विचारों और अनुभवों को साझा करते हुए सीखने की प्रक्रिया को और अधिक समृद्ध बना रहे हैं।
संतोष पटेल का कथन
कार्यक्रम के समन्वयक श्री संतोष पटेल ने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि यदि शिक्षकों में नैतिकता, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा तो उसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों और समाज पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविरों के माध्यम से छात्र-अध्यापकों में न केवल शिक्षण कौशल का विकास होता है बल्कि उनमें जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है।
उन्होंने आगे कहा कि भविष्य के शिक्षक यदि मूल्य आधारित शिक्षा को अपनाते हैं तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना निश्चित रूप से संभव है।
प्रतिभागियों में उत्साह का माहौल
कार्यशाला में भाग ले रहे छात्र-अध्यापकों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रतिभागी सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लेकर अपने विचार साझा कर रहे हैं। इससे शिविर का वातावरण अत्यंत प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक बन गया है।
डाइट धर्मजयगढ़ द्वारा आयोजित यह “चेतना विकास मूल्य शिक्षा परिचय शिविर” छात्र-अध्यापकों को एक संवेदनशील, जिम्मेदार और मूल्यनिष्ठ शिक्षक बनने की दिशा में प्रेरित कर रहा है। पाँच दिनों तक चलने वाला यह शिविर प्रतिभागियों के लिए एक सार्थक, प्रेरणादायी और उपयोगी अनुभव सिद्ध हो रहा है।






