
बरमकेला///पिछली पीढ़ियों से प्राप्त बहुमूल्य चीजें, जिनको वर्तमान पीढ़ी भविष्य की पीढ़ियों के लिए सहेजकर रखती है, धरोहर मानी जाती हैं। भारतीय समाज बुजुर्गों को भी धरोहर सरीखा मानता आया है और उनको पर्याप्त सम्मान देता है। वरिष्ठ नागरिक हमारे परिवार, समाज, राष्ट्र, मानव-सभ्यता और संस्कृति के संरक्षक होते हैं। वे अनुभव के कोष होते हैं, जिनमें पिछली समस्त पीढ़ियों का अद्भुत ज्ञान संरक्षित रहता है। उन्हीं के माध्यम से हम भाषा, संस्कार, ज्ञान- विज्ञान आदि सीखते हैं। वे बुजुर्ग ही होते हैं, जो नन्हे-नन्हे बच्चों की उंगलियां थामकर बिना झल्लाए उनके बेसिर-पैर के सवालों का सहजता से उत्तर देते हैं, उनको सिखाते हैं और उनकी समझ विकसित करते हैं। इससे बच्चों में भावनात्मक संबंधों का बीजारपण होता है और वे भी अपने बड़े-बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील बनते हैं।

रतन शर्मा अध्यक्ष चेंम्बर आफ कार्मश ने अपने संदेश में कहा है कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सम्मान के प्रति समाज में सकारात्मक वातावरण विकसित करने के लिए पूरे विश्व में एक अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाता है।बुजुर्ग, परिवार ही नहीं पूरे समाज के लिए अमूल्य धरोहर होते हैं। वे जीवन भर परिवार और समाज को अपना अमूल्य योगदान देते हैं। उनके पास अनुभव का अनमोल खजाना होता है। बुजुर्गों के अनुभवों से हमें सीखने की कोशिश करनी चाहिए। बुजुर्गों की खुशी, स्वास्थ्य और सम्मान का पूरा ध्यान रखना हमारी नैतिक जवाबदारी है।






