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जैव विविधता को समेटा हुआ गोमर्डा अभ्यारण



सारंगढ़ बिलाईगढ़/नवीन जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है, जहां जल और जंगल के जैव विविधता को समेटे हुए गोमर्डा अभ्यारण्य है। यह
गोमर्डा अभ्यारण्य जिला मुख्यालय सारंगढ़ से सरायपाली मार्ग में स्थित है, जिसका क्षेत्रफल सारंगढ़ और बरमकेला ब्लॉक में फैला है। प्रारंभिक गठन के समय (1975) गोमर्डा अभ्यारण्य का क्षेत्रफल मात्र 133.32 वर्ग कि.म. था। वन्य प्राणियों की बढती हुई संख्या भविष्य में उनके विकास और परिवर्धन की संभावनाओं को देखते हुए अभ्यारण्य क्षेत्र का विस्तार 1983 में किया गया, वर्तमान में गोमर्डा अभ्यारण्य का कुल क्षेत्रफल 277.82 वर्ग कि.मी. है। अभ्यारण्य का अधिकाश भाग पहाडी है। राठन बुढाघाट, गोमर्डा, दानव करवट दैहान आदि पहाडियॉं इस क्षेत्र के प्राकृतिक सौन्दर्य की अभिवृद्धि करती है, साथ ही वन्य प्राणियों के लिए प्राकृतिक वास स्थलों का निर्माण भी। लात, मनई आदि छोटी-छोटी जल प्रवाही नदियां इस क्षेत्र के वन्य जीवों की तृष्णा शांत करते हुए तटवर्ती क्षेत्रों को हरियालीपूर्ण विविधता प्रदान करती है।



गोमर्डा अभ्यारण्य क्षेत्र मुख्यतः उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वनों से आच्छादित है। यत्र तत्र बांस के कुछ झुरमुट भी पाए जाते है। पर्वतीय ढलानों और शुष्क पठारों में वन सस्य का अभाव सा परिलक्षित होता है, किन्तु मैदानों भाग और घाटियों में अच्छे सघन वन कहीं-कहीं देखने को मिलते है। अभ्यारण्य में मुख्यतः साजा, धावरा, तेन्दू आचार, मिर्रा, महुआ, कर्रा, सलई, बीजा, ऑंवला, खम्हार, दोटा बेल, सेमर, हरसिंगार, धवई, कोरिया, बेर, पापडा इत्यादि के वृक्ष पाये जाते है।

वानस्पतिक विविधता तथा प्राकृतिक संरचनाओं के अनुरूप इस अभ्यारण्य में अनेक प्रकार के वन्य प्राणि पाये जाते हैं जिसमें तेन्दुआ, लकडबग्घा, जंगली कुत्ते, सियार, लोमडी, भेडिया, जंगली बिल्ली आदि मांसाहारी जीव, गौर, नील गाय, साम्हर, चीतल, कोटरी आदि शाकाहारी जीव तथा सेही, गिलहरी, खरगोश, चूहे आदि कूतंक प्राणी उल्लेखनीय है। भालू जो सर्वभक्षी माना जाता है, इस अभ्यारण्य में बहुतायत में पाए जाते है। राष्ट्रीय पक्षी मोर, राज्य पक्षी दूधराज तथा अनेक रंग-बिरंगे पक्षी देखने को मिलते है। भ्रमण के लिए उपयुक्त समय- अक्टूबर माह से जून के बीच अभ्यारण्य क्षेत्र में भ्रमण किया जा सकता है।, किन्तु वन्य प्राणियों की सर्वाधिक परिदृष्टयता माह फरवरी से जून तक रहती है। ग्रीष्म में जल स्त्रोतों के आसपास वन्य प्राणियों के देखे जाने की संभावनायें काफी बढ़ जाती है। यहां पहुंचने के लिए रायपुर एयरपोर्ट 200 किमी और रायगढ़ रेलवे स्टेशन से लगभग 60 किमी की दूरी पर है।

*गोमर्डा अभ्यारण के दर्शनीय स्थल*

टमटोरा : झीलनुमा तालाब के पार्श्व भाग में स्थित राठन पहाड़ियों की छटा के लिए टमटोरा के आसपास का क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य दर्शनीय है। यहाँ तालाब के किनारे वन विश्राम गृह का निर्माण किया गया है। गर्मी के दिनों में वन्य प्राणी इस तालाब में अपनी प्यास बुझाने के लिए आते हैं जिसे सुबह एवं शाम को देखा जा सकता है |

राजा मचान : लात नाला के पास बना यह वाच टावर पक्षियों के अवलोकन हेतु एक उत्तम स्थान है। एक वाच टावर से नाले का एवं वन क्षेत्रों का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है लात नाला में डार्टर एवं अन्य बतख प्रजाति के पक्षी देखे जा सकते हैं |

खपान जल प्रपात : इस जलप्रपात में माह दिसंबर -जनवरी तक पानी बहता रहता है परंतु नीचे गड्ढे में वर्ष भर पानी उपलब्ध रहता है। गर्मी के दिनों में गौर यहाँ दिखते हैं। यहाँ पर बंदर एवं अनेक प्रकार की तितलियाँ देखने को मिलती है।  यहाँ पर भी पिकनिक का आनंद लिया जा सकता है।

रमतल्ला तालाब : जंगल के बीच में बना यह तालाब बहुत ही रमणीक है। तालाब की मेड पर एक शिव मंदिर का निर्माण किया गया है। ग्रामीण यहाँ शिव रात्रि के दिन पूजा अर्चना करने आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि कोई भी व्यक्ति इस तालाब में आये वन्यप्राणियों का शिकार करना चाहता है तो उसकी बंदूक नहीं चलती एवं शिकार नहीं कर पाता है।

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Sudhir Chouhan

पत्रकार सुधीर चौहान (संपादक) स्वतंत्र भारत न्यूज़ मो.नं.9098259961

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