
बरमकेला:- अंचल की प्रसिध्द श्री गोवर्धन गिरिराज गिरधारी मन्दिर एकादशी भजनकीर्तन के लिए प्रसिध्द है। विदित है कि कुम्हारी गोवर्धन मन्दिर में प्रत्येक एकदशी के दिन संध्याभजन कीर्तन का आयोजन किया जाता है जिसमे सैकड़ो भक्त जन भजन कीर्तन के लिए आते हैं। न कुम्हारी बल्कि मेंडरा, सराईपाली, लेन्धरा, कलाखूंटा, पड़कीपाली, खिचरी, बरमकेला से भी भक्तगण संध्याभजन में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।प्रत्येक एकादशी लगभग300-350 भक्तगण उपस्थित होते हैं तथा सभी के लिए विभिन्न प्रसाददाताओ द्वारा प्रसाद दिया जाता है। तथा यहाँ की भजन कीर्तन की प्रसिद्धि का अनुमान इसी लगाया जा सकता है कि छत्तीसगढ़ की सबसे सक्रिय साहित्यिक संस्था “काव्य कलश कला एवं साहित्य मंच खरसिया ” द्वारा भी एक एकादशी प्रसाद दिया गया है जिसमें संस्था के संस्थापक श्री-पुरुषोत्तम प्रसाद गुप्ता,अध्यक्ष-छत्तीसगढ़ की श्रृंगार की विख्यात कवियत्री श्रीमती प्रियंका गुप्ता”प्रिया” उपाध्यक्ष-साहित्यकार,विचारक श्री राकेश नारायण जी उपस्थित रहे।

कुम्हारी में पहले से धार्मिक ग्राम रहा है जहां 1910 में निर्मित जगन्नाथ मंदिर भी है। न केवल बुजुर्गों अपितु नवयुवाओ में भजन कीर्तन के प्रति गजब लगाव है इसलिए नवयुवक आधुनिक तामझाम के बजाए भक्तिमय माहौल में गिरधारी मंदिर में अपना जन्मोत्सव मनाने लगे हैं। विगत दिनों गिरधारी यादव ने भी अपने युवा साथियों के साथ गिरधारी मंदिर में ही अपना जन्मोत्सव मनाया।

झरिया यादव समाज बरमकेला के कार्यकारी अध्यक्ष श्री पदुमलाल यादव जी ने मन्दिर एकादशी भजनकीर्तन व विभिन्न धार्मिक आयोजन की सफलता को ईश्वर का आशीर्वाद कहा तथा इन आयोजनों श्रेय मन्दिर के व्यवस्थापक-गौरीशंकर,ब्रजकिशोर,मनोज,मुन्ना,गिरधारी तथा कीर्तन मण्डली के -किंकर प्रसाद, लक्ष्मीकांत, मुनु, सम्पत, बृजलाल, टेकलाल, भगवानों, पुरन्धर,अशोक, निरंजन,सौदागर, हेमसागर,नारद,घासीराम,प्रेमलाल,कुमार, श्याम, रुक्मण, सहनी, किष्टो, अनिल, जयलाल, सम्मेलाल, गोपाल तथा सभी भक्तजनों व प्रसाददाताओ को दिया।






