
रायगढ़// अंबूजा कोयला खदान की प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है। 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई के खिलाफ आज पुरूंगा, सांभरसिंघा, तेदूमूडी और कोकदार गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी एकजुट होकर रैली निकालते हुए जिला मुख्यालय पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
हाथों में बैनर और तख्तियां लिए ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे अपने जंगल, जमीन और पर्यावरण को किसी कीमत पर बर्बाद नहीं होने देंगे। उनका कहना है कि कोयला खदान से होने वाला ध्वनि और वायु प्रदूषण न केवल उनके जीवन के लिए संकट बनेगा, बल्कि उनकी पारंपरिक जीवनशैली और आजीविका पर भी भारी असर डालेगा।

रैली के दौरान “दिल्ली में बैठकर जमीनों की नीलामी बंद करो” जैसे नारे गूंजते रहे। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक जनसुनवाई रद्द नहीं की जाती, आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो इसे और बड़ा रूप दिया जाएगा।
महिलाओं ने भी प्रशासन पर सवाल उठाए कि आखिर उद्योगपतियों के सामने व्यवस्था झुक क्यों रही है? उन्होंने कहा कि इतने बड़े विरोध के बाद भी प्रशासन की खामोशी बहुत कुछ कह रही है। प्रभावित गांवों से लेकर जिला मुख्यालय तक विरोध की आवाज गूंज रही है, लेकिन प्रशासन साइलेंट मोड में है।
ग्रामीणों ने पेसा कानून का हवाला देते हुए कहा कि संविधान ने उन्हें जल, जंगल और जमीन की रक्षा का अधिकार दिया है और वे इस अधिकार से पीछे नहीं हटेंगे। विरोध स्थल पर कई सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचे और ग्रामीणों का समर्थन किया।
अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या आदिवासी मुख्यमंत्री तक ग्रामीणों की आवाज पहुंचेगी या फिर प्रशासन उद्योगपति के दबाव में जनसुनवाई कराने पर अडिग रहेगा। विरोध की तीव्रता को देखते हुए 11 नवंबर की जनसुनवाई तक पहुंचना प्रशासन के लिए आसान नहीं दिख रहा है।






