
धान खरीदी से पहले राजस्व व्यवस्था पर संकट के आसार, पदोन्नति और वेतनमान में सुधार समेत विभिन्न मांगों को लेकर पटवारी लामबंद
रायगढ़। वेतन विसंगति, लंबित पदोन्नति और पीवी ऐप की तकनीकी दिक्कतों को लेकर रायगढ़ जिले के पटवारियों का आक्रोश अब आंदोलन में बदल गया है। अपनी मांगों को लेकर पटवारी मिनी स्टेडियम में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलन के चलते राजस्व कार्यों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। वहीं, धान खरीदी का सीजन नजदीक होने से किसानों की चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।
पीवी ऐप की तकनीकी दिक्कतों पर पटवारियों की आपत्ति
पटवारियों के विरोध का प्रमुख मुद्दा धान के रकबे और फसलों के भौतिक सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पीवी ऐप को लेकर है। आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या, सर्वर संबंधी परेशानियों और ऐप की तकनीकी जटिलताओं के कारण मैदानी स्तर पर काम करना मुश्किल हो रहा है।
पटवारियों की मांग है कि डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले जमीनी परिस्थितियों और तकनीकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान किया जाए, ताकि कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव न पड़े और कामकाज भी प्रभावित न हो।
वेतन विसंगति और पदोन्नति में देरी से नाराजगी
पटवारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की जा रही है। राजस्व संबंधी कार्यों के साथ विभिन्न शासकीय योजनाओं और मैदानी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।
कर्मचारियों के मुताबिक, इस संबंध में पहले भी शासन और संबंधित अधिकारियों के समक्ष मांगें रखी गईं, लेकिन ठोस निर्णय नहीं होने से नाराजगी बढ़ती गई। अब पटवारियों ने मांगों के निराकरण तक आंदोलन जारी रखने का रुख अपनाया है।
धान खरीदी से पहले किसानों की बढ़ सकती है परेशानी
धान खरीदी का समय नजदीक होने के कारण पटवारियों की हड़ताल का असर कृषि रकबे के सत्यापन और संबंधित राजस्व प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। इन कार्यों में देरी होने पर किसानों को पंजीयन और धान विक्रय से जुड़ी प्रक्रियाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा नामांतरण, सीमांकन, फौती प्रकरण तथा आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों से जुड़े कार्यों पर भी असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, इन सेवाओं में वास्तविक रूप से कितने कार्य प्रभावित हुए हैं, इसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
अब शासन के फैसले पर टिकी निगाहें
मिनी स्टेडियम में जारी आंदोलन के बीच अब सबकी निगाहें शासन और जिला प्रशासन की पहल पर टिकी हैं। पटवारी अपनी मांगों के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं आम लोगों और किसानों को राजस्व सेवाओं के सुचारु संचालन का इंतजार है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि धान खरीदी शुरू होने से पहले इस गतिरोध का समाधान निकल पाएगा या नहीं? यदि समय रहते पटवारियों की मांगों और पीवी ऐप से जुड़ी तकनीकी समस्याओं पर सार्थक बातचीत नहीं हुई, तो इसका असर राजस्व व्यवस्था के साथ किसानों के जरूरी कामकाज पर भी पड़ सकता है। अब जरूरत है कि शासन, प्रशासन और पटवारी प्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित कर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण हो और आम जनता को परेशानी न उठानी पड़े।






