
◆ न्यायसंगत फैशले न आने की स्थिति में ओबीसी महासंघ विधानसभा चुनाव का करेगी पूर्ण रूप से बहिष्कार: दिनेश कुमार पटेल, लैलूंगा
रायगढ़:- आरक्षण एक ऐसा शब्द है, जिसका नाम हर दूसरे व्यक्ति के मुह पर है, अर्थात् आरक्षण भारत मे, बहुत चर्चा मे है . वैसे तो हम, इक्कीसवी सदी मे जी रहे है और अब तक आरक्षण कि ही, लड़ाई लड़ रहे है ।युवाओ और देश के नेताओ के लिये, आज की तारीख मे सबसे अहम सवाल यह है कि:-
◆ आरक्षण किस क्षेत्र मे, और क्यों चाहिये ?
◆ क्या सही मायने मे, इसकी हमे जरुरत है ? या नही
◆ यदि आरक्षण देना भी है तो, उसकी नीति क्या होनी चाहिये ?
आरक्षण, उस व्यक्ति को मिलना चाहिये, जो सही मायने मे उसका हकदार है उसका जबकि, उस व्यक्ति को, कोई फायदा ही नही मिल रहा है। क्योंकि, भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है यहा हर जाति समुदाय के, या वर्ग के लोग निवास करते है। भारत मे, बहुत प्राचीन प्रथा थी जो, अंग्रेजो के समय से थी जिसमे, उच्च-नीच का भेद-भाव बहुत होता था। धीरे-धीरे इस छोटी सी समस्या ने, एक विशाल रूप ले लिया। जिसके चलते जाति के आधार पर, व्यक्ति की पहचान होने लगी, और उसी जाति के आधार पर उसका शोषण होने लगा। छत्तीसगढ़ में आरक्षण को लेकर सियासत बहुत अधिक तेज हो गयी है। पिछले साल हाई कोर्ट ने आरक्षण की सीमा अधिकतम 50 प्रतिशत ही रखने के आदेश दिए और पूर्व की व्यवस्था पर रोक लगा दी थी। इसके बाद अलग-अलग जाति वर्गों के निशाने पर आई कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में नया विधेयक लाकर आरक्षण की सीमा 76 प्रतिशत कर दिया साथ ही विधेयक को लागू करने के लिए राजभवन भेजा था, लेकिन अब तक विधेयक राज्यपाल महोदया के हस्ताक्षर से वंचित है विधेयकको लेकर आज जाति वर्ग के लोग फिर से सड़क पर उतरने को तैयार है।
इसी तारतम्य में आज ताजा मामला रायगढ़ के लैलूंगा का है जहां रविवार को ओबीसी वर्ग ने जन अधिकार रैली निकली जहाँ माहीलाओ ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया वही संगठन में भी बड़ी गर्मजोशी देखी गयी।
ओबीसी महासमभा के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम साहू ने कहा कि: सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ की अगर ओबीसी वर्ग की आबादी देखी जाए तो भी ओबीसी वर्ग की आबादी पूरे प्रदेश में आज आधे से ज्यादा है इस आधार पर हमें 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना न्यायसंगत होगा, इसके अलावा भविष्य में हम जनसंख्या के आधार पर ओबीसी वर्ग को 52 प्रतिशत का लाभ पदोन्नति, राजनीतिक, शिक्षण संस्थाओं नौकरी समेत तमाम जगहों पर लाभ लेने के लिए चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। साथ ही चुनाव में जिस पार्टी द्वारा हमारे मांगों का सम्मान किया जाएगा, ओबीसी महासभा उनको ही अहमियत देगा। चुनाव में हम अपनी अहमियत राजनीतिक दलों को पूर्ण रूप से बताएंगे।
लैलूंगा मीडिया प्रभारी दिनेश कुमार पटेल ने बताया कि चुनाव में महज साल भर भी बाकी नहीं है उस बीच आरक्षण के मुद्दे को चुनावी दांवपेच के अलावा और कुछ समझना समझ से परे है। सरकार की घोषणाओं को लेकर भी उन्होंने कई सवाल खड़े किये और कहा अगर सरकार अपनी बातों पर अडिग नही रही तो ओबीसी महासंघ पुर्ण रूप से विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने मजबूर होगा , राज्यपाल महोदया से प्रस्ताव पारित न होना सरकार के खोखले विधेयक के साथ साथ उनकी कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े करता है।






