
रायगढ़:- बरसात में गड्ढे बने जलकुंडशहर की सीमा से सटे बड़े अतरमुड़ा पंचायत में विकास की तस्वीर बेहद डरावनी नजर आ रही है। गांव के भीतर से मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली करीब आधे किलोमीटर की सड़क सड़क कम और जानलेवा गड्ढों का जाल ज्यादा बन चुकी है। सड़क पर छोटे-बड़े मिलाकर सौ से अधिक गड्ढे हैं और कई जगह तो गड्ढे इतने गहरे हैं कि बरसात में पानी भरने के बाद सड़क और गड्ढे काभारी फर्क तक दिखाई नहीं देता।वाहनों के दबाव से सड़क का निकला दमस्थिति ग्रामीण स्कूला केकेका सुनहर बल्कि रायगढ़ शहर से सटे उस इलाके की है जहां रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, दोपहिया चालक और अन्य राहगीर इस रास्ते से गुजरते हैं। घरों के ठीक सामने बने गहरे गड्ढे हर दिन हादसे कान्योता दे रहे हैं।बरसात में सड़क या मौत का जाल-बारिश होते ही सड़क की बदहाली और भयावह हो जाती है।

बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लगता। दोपहिया वाहन चालक जरा-सी चूक में अनियंत्रित हो सकते हैं। पैदल चलने वालों के लिए सड़क किनारे सुरक्षित जगह तक नहीं बची है। विडंबना यह है कि यह समस्या केवल बरसात की नहीं है। गर्मी और सूखे मौसम में भी गड्ढों से उखड़ी सड़क राहगीरों के लिए खतरा बनी रहती है। यानी मौसम कोई भी हो, बड़े अतरमुड़ा की इस सड़क पर सफर जोखिम से खाली नहीं है।भारी वाहनों ने तोड़ दी सड़क की कमर-दूरी बचाने के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल लगातार भारी मालवाहक वाहनों द्वारा किया जा रहा है। जिस सड़क पर सामान्य ग्रामीण यातायात के लिए पर्याप्त रखरखाव जरूरी था, उस पर भारी वाहनों के लगातार दबाव ने सड़क की हालत और बिगाड़ दी है।

यहां सवाल सिर्फ सड़क टूटने का नहीं, जिम्मेदारी तय करने का भी है। यदि सड़क भारी वाहनों का दबाव सहने के लिए नहीं बनी है तो उनकी आवाजाही नियंत्रित क्यों नहीं की गई? पंचायत चाहे तो स्थानीय स्तर पर ऐसे यातायात को नियंत्रित करने के लिए संबंधित विभाग के समक्ष प्रभावी पहल कर सकती है। लेकिन वर्षों से समस्या जस की तस बनी हुई है।गांव की सरकार आखिर कर क्या रही हैबत में ही है। करीब नलेवा छोटे-जगह ने के का ता। नसान नहीं. सटे जहां मीण, अन्य जरते बने नेकाहोते बडे-का -सी के है। की बड़ी नानीदूरी बारी नेग्राम पंचायत को स्थानीय समस्याओं के समाधान की पहली जिम्मेदार संस्था माना जाता है।
बावजूद इसके वर्षों से सड़क की मरम्मत नहीं होना पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे गंभीर बात यह है कि ग्रामीणों को इस बदहाल सड़क से रोज गुजरना पड़ रहा है। उनके पास दूसरा आसान विकल्प भी नहीं है। ऐसे में सड़क की अनदेखी केवल प्रशासनिक उदासीनता नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही का विषय बन जाती है।हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?बड़े अतरमुड़ा की सड़क पर मौजूद गड्ढे अब केवल विकास की कमी का प्रतीक नहीं हैं. बल्कि संभावित हादसे की खुली चेतावनी हैं।
शासन-प्रशासन को तस्वीर सामने आने के बाद भी यदि तत्काल संज्ञान नहीं लिया गया और किसी दिन यहां गंभीर दुर्घटना होती है. तो सवाल उठेगा कि जिम्मेदार तंत्र ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। जरूरत खानापूर्ति के लिए गिट्टी डालने या बारिश के दौरान अस्थायी पैबंद लगाने की नहीं, बल्कि स्थायी और गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण की है। साथ ही भारी मालवाहकों की आवाजाही की समीक्षा, जल निकासी की व्यवस्था और निरीक्षण भी जरूरी है। सड़क की वास्तविक स्थिति का तकनीकी निरीक्षण भी जरूरी है।





