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पीएम श्री स्कूल सारंगढ़ से हजारों पुस्तकें गायब,प्रभारी प्राचार्य सुदीप्त प्रधान पर लगे गंभीर आरोप,छात्रों की हो रही किताबें गायब या फिर बेचा जा रहा किताबों को ?

2 महीने से किताबों के लिए 9 और 10 वी के छात्र भटक रहे पालक आक्रोशित इसके पूर्व प्रधान पर शैक्षणिक भ्रमण के नाम पर फर्जी बिल के साथ 3 लाख के गबन के मामले की हुई थी शिकायत शिक्षकों के त्यागपत्र पर मासिक वेतन के 3 लाख के फर्जी आहरण की भी हो चुकी है शिकायत शिक्षा विभाग का अजब गजब कारनामा फिर आया सामने शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन आखिर क्यों नहीं करते कार्यवाही ? शिक्षा विभाग में छात्रों के शिक्षा पर कौन डाल रहा डाका किनका है इन्हें संरक्षण ? कांग्रेस शासन काल में आत्मानंद स्कूल के प्राचार्य रहे सुदीप्त प्रधान, शासन बदलने पर भी बने हुए हैं प्रभारी प्राचार्य

सारंगढ़-बिलाईगढ़ न्यूज/ जिला मुख्यालय स्थित पीएम श्री स्कूल (सेजेस) एक बार फिर भारी भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए पाठ्य पुस्तक निगम से आई हजारों किताबें स्कूल से गायब हो गई हैं। कई महीने बीत जाने के बाद भी छात्रों को पुस्तकें नहीं मिली हैं, जिससे आक्रोशित पालकों ने स्कूल पहुँचकर प्रशासन से जवाब माँगा।

किताबों का अता-पता नहीं :- पाठ्य पुस्तक निगम से आई किताबों की रिसिप्ट प्रभारी प्राचार्य सुदीप्त प्रधान द्वारा दी गई थी, लेकिन जब पालकों ने पुस्तकें न मिलने की शिकायत की, तो भौतिक सत्यापन में किताबें गायब पाई गईं।

अधिकारियों की चुप्पी और सुस्ती :- जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) का कार्यालय स्कूल परिसर से लगा हुआ है। महज 25 से 50 मीटर की दूरी पर डीईओ कार्यालय स्थित है। इसके बावजूद अब तक किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर जांच करने की जहमत नहीं उठाई।

पुरानी शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं :- आरोपी प्रभारी प्राचार्य सुदीप्त प्रधान पर पहले भी शैक्षणिक भ्रमण के नाम पर 3 लाख रुपये के फर्जी बिल और शिक्षकों के त्यागपत्र के बाद उनके 1 माह के वेतन (~3 लाख रुपये) के गबन के गंभीर आरोप लग चुके हैं।

विभागीय संरक्षण का संदेह :- कांग्रेस शासन काल से आत्मानंद स्कूल में डीएमएफ (DMF) राशि सामान खरीदी के गड़बड़ी के आरोप भी सुर्खियों में रहे हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद भी उनका प्रभार बने रहना ऊपरी संरक्षण की ओर इशारा करता है।शिक्षा विभाग पर उठते गंभीर सवाल, क्या किताबें बेच दी गईं? हजारों किताबों के गायब होने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि या तो रद्दी में किताबें बेच दी गईं या भारी लापरवाही बरती गई अब यह तो जांच के बाद ही खुलासा होगा।जांच के नाम पर लीपापोती :- मीडिया द्वारा सवाल पूछने पर शिक्षा विभाग केवल “जांच टीम गठित करने” का रटा-रटाया जवाब दे रहा है, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं दिखती।

भ्रष्टाचार का अड्डा बना विभाग :- हाल ही में बरमकेला BEO को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने की घटना के बाद, इस नए मामले ने जिले में शिक्षा विभाग की साख पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ और सरकारी राशि की लूट को लेकर अब स्थानीय जनता, पालक संघ और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। यदि जल्द ही इस मामले में ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो जिला स्तर पर बड़े उग्र आंदोलन भी हो सकते हैं।

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Sudhir Chouhan

पत्रकार सुधीर चौहान (संपादक) स्वतंत्र भारत न्यूज़ मो.नं.9098259961

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